अमानगंज तहसील के ग्राम उडला में बुद्ध सिंह सांटा के 69 बाढ़ प्रभावित परिवारों को बसाने के फैसले का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया है। महिलाओं ने आत्महत्या की चेतावनी दी है और प्रशासन पर प्राकृतिक व सामाजिक अन्याय का आरोप लगाया है।

हाइलाइट्स
अमानगंज, स्टार समाचार वेब
जिले के अमानगंज तहसील अंतर्गत ग्राम उडला में बुद्ध सिंह सांटा के बाढ़ प्रभावित 69 परिवारों को शासकीय भूमि पर बसाए जाने के जिला प्रशासन के फैसले का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है। ग्रामवासियों ने इसे कलेक्टर का बेतुका आदेश बताया है और कहा है कि अगर उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करवाया गया तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे और आत्महत्या तक कर सकते हैं। प्रशासन की ओर से गुनौर एसडीएम रामनिवास चौधरी, अमानगंज तहसीलदार ममता मिश्रा, और राजस्व अमले के साथ भारी पुलिस बल के साथ ग्राम उडला पहुंचकर आबंटित जमीन का सीमांकन किया गया। इससे पहले भी ग्रामीणों के विरोध के चलते प्रशासन को खाली हाथ लौटना पड़ा था, मगर इस बार कलेक्टर के आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस बल के साथ अमला पुन: पहुंचा। इस दौरान ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया।
मौके पर उपस्थित आदिवासी महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर उनकी जमीन छीनी गई, तो वे आत्महत्या जैसा कदम उठाएंगी। एक महिला ने तो प्रशासन के सामने कहा कि वह 'रस्सी के सहारे फांसी लगा लेगी' क्योंकि जिस जमीन पर वह वर्षों से जीवन यापन कर रही हैं, उसे अब बाढ़ प्रभावित बाहरी लोगों को सौंपा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर कब्जा दिलाया जा रहा है, वहां पर गांव की नर्सरी स्थित है, जिसे उन्होंने पर्यावरण की दृष्टि से विकसित किया था। अब उस पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, जो न सिर्फ प्राकृतिक नुकसान है बल्कि सामाजिक अन्याय भी है। गांव वालों का यह भी सवाल है कि जब बुद्ध सिंह सांटा गांव में बाकी लोग निवास कर सकते हैं, तो इन 69 परिवारों को वहीं क्यों नहीं बसाया जा रहा? अगर वह पूरा गांव ही बाढ़ प्रभावित है, तो सिर्फ कुछ परिवारों को उडला में क्यों बसाया जा रहा है, पूरे गांव को क्यों नहीं पुनर्वासित किया जा रहा? प्रशासनिक दल द्वारा सीमांकन की कार्रवाई के दौरान गांव वालों ने जमकर प्रदर्शन और प्रशासन से बहस की। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके सवालों का कोई जवाब नहीं मिल रहा है, जिससे असंतोष और अधिक गहराता जा रहा है।

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