रीवा सर्किल में 1420 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। उपभोक्ता बिजली का उपयोग तो कर रहे हैं लेकिन भुगतान नहीं कर रहे। अफसरों की लापरवाही, राजनीतिक संरक्षण और पुराने खातों की सफाई न होने से एरियर का बोझ लगातार बढ़ रहा है। पढ़ें इस रिपोर्ट में बिजली विभाग की बदहाल हालत की पूरी सच्चाई।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
बिजली का बकाया एरियर की राशि सुन कर आप चौंक जाएंगे। रीवा सर्किल में 1420 करोड़ रुपए का सिर्फ एरियर ही बकाया है। इसमें भी सतना और रीवा सर्किल सबसे टॉप पर है। यहां एलटी और एचटी का सबसे अधिक बकाया है। उपभोक्ताओं ने बिजली तो खूब जलाई लेकिन अब बिल नहीं चुका रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही से बिजली विभाग का 1420 करोड़ रुपए फंस गया है।
मप्र सरकार उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करा रही है। घरेलू बिजली 24 घंटे दे रही है। 10 घंटे कृषि फीडर में बिजली उपलब्ध करा रही है। इसके बाद भी उपभोक्ता बिजली जलाने के बाद बिल नहीं जमा कर रहे हैं। छोटे उपभोक्ताओं पर तो विद्युत विभाग तुरंत कार्रवाई कर देती है। उनके कनेक्शन तक काट देती है लेकिन बड़े उपभोक्ताआें को संरक्षण दे रही है। यही वजह है कि बिजली का घाटा बढ़ता जा रहा है। लोगों ने रीवा संभाग में करीब 1420 करोड़ की बिजली जलाई लेकिन इसका बिल नहीं चुकाया। अब यह राशि दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। इस बिल की वसूली के लिए विद्युत वितरण कंपनी ने कई आॅफर दिए लेकिन उपभोक्ताआें ने फिर भी बिल जमा नहीं किया। डिवीजन में बैठे अधिकारी भी इस बिल की वसूली में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके कारण ही मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का दिवाला निकलता जा रहा है।
अधिकारियों की लापरवाही पड़ रही है भारी
विद्युत विभाग के अधिकारियों लापरवाही भी बिजली का एरियर बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। अधिकारी फील्ड में निकलते ही नहीं है। बकायादारों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी राजस्व वसूली के लिए उपभोक्ताओं के घर तक तो पहुंचते है लेकिन लेन देन कर लौट आते हैं। इसके कारण विद्युत विभाग का बकाया वसूल नहीं हो पाता। रीवा बिजली चोरी के मामले में वैसे ही बदनाम है। राजस्व के एरियर में भी आगे ही है।
सिटी डिवीजन भी पीछे नहीं
शहर में उपभोक्ताओं को 24 घंटे बराबर बिजली मिल रही है। यहां पर्याप्त स्टाफ भी मौजूद हैं। बिना बिजली के शहर में लोगों का रहना तक मुश्किल है। आसानी से अधिकारी, कर्मचारी उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंच जाते हैं। फिर भी सिटी डिवीजन में 39 करोड़ रुपए उपभोक्ताओं ने दबा कर रखा है। इसके अलावा अन्य चार डिवीजन में तो हालात खराब है। मऊगंज, त्योंथर, ईस्ट और वेस्ट डिवीजन में 100-100 करोड़ से भी अधिक का एरियर बकाया है। इसे वसूलने में अब अधिकारियों की सांस फूलने लगी है।
हर महीने 20 फीसदी एरियर वसूली का लक्ष्य
विद्युत विभाग के हर डिवीजन को करेंट बिल डिमांड के साथ ही एरियर राशि का 20 फीसदी डिमांड के साथ जुड़ कर आता है लेकिन इस एरियर की राशि को वसूलने में ही अधिकारी लापरवाही बरतते हैं। हर महीने बिल डिमांड तक ही सिमट कर रह जाते हैं। नई डिमांड की राशि भी पूरी तरह से नहीं वसूल पाते। यही वजह है कि बिजली विभाग का यह एरियर घाटा खत्म नहीं हो रहा है।
इसलिए भी नहीं घट रहा एरियर
कई पुराने उपभोक्ताओं ने कनेक्शन लिया। अब वह कनेक्शन और कनेक्शनधारी ही नहीं रहे। घर उजड़ गए। मौके पर कुछ भी नहीं बचा। इसके बाद भी ऐसे उपभोक्ताओ पर बकाया राशि बनी हुई है। इस राशि को एरियर से हटाया ही नहीं गया। यही वजह है कि एरियर का बोझ बिजली विभाग पर महीने दर महीने बढ़ता ही जा रहा है।
रीवा सर्किल में बकाया एरियर
डिवीजन बकाया राशि
सिटी 39.76
मऊगंज 119.22
त्योंथर 103.40
ईस्ट 135.78
वेस्ट 127.82
योग 526.01
बकाया एरियर
सर्किल राशि
रीवा 559.83
सतना 561.58
सीधी 143.88
सिंगरौली 155.21
रीवा रीजन टोटल 1420.51
(राशि के आंकड़े करोड़ में हैं)


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