अमेरिका-ईरान संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी है, जिसके बाद ब्रिटेन और हूती विद्रोहियों की गतिविधियों से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान पर अब तक के सबसे बड़े हमले की चेतावनी दिए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ट्रम्प के इस कड़े रुख के बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। इस बीच, ब्रिटेन की सैन्य तैयारी और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों ने इस संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रम्प ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध की तमाम तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं, और अब केवल अंतिम फैसले का इंतजार है। उन्होंने ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि देश ने अभी तक पर्याप्त 'दर्द' नहीं झेला है।
ट्रम्प के इस बयान के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। अराघची ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष को समाप्त करने का एकमात्र और सही रास्ता कूटनीतिक बातचीत है, न कि नए सैन्य हमले।
इस बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष की तपिश अब यूरोप तक पहुंच चुकी है। ब्रिटेन सरकार ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने रणनीतिक सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
इसके तहत हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया और ब्रिटेन का ग्लॉस्टरशायर स्थित फेयरफोर्ड एयरबेस अमेरिकी युद्धक विमानों के संचालन के लिए उपलब्ध करा दिए गए हैं। हालांकि, इस फैसले के बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने खुली चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इन ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का उपयोग करता है, तो उन्हें भी वैध निशाना बनाया जाएगा।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार पर भी दिखने लगा है। यमन के ईरान-समर्थक हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो प्रमुख तेल टैंकरों—'एन्सेलिया' और 'लैला' को निशाना बनाया। विद्रोहियों ने इन जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के जरिए भीषण हमला किया, जिससे दोनों जहाजों में भयंकर आग लग गई। इस हमले से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षा को लेकर भारी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के जलडमरूमध्य में मंडराते खतरे को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने बड़े कदम उठाए हैं। हूती विद्रोहियों के हमलों के डर से कम से कम 10 बड़े जहाजों ने इस खतरनाक रास्ते से गुजरने के बजाय अपने रूट में भारी बदलाव किया है। अब ये जहाज मध्य पूर्व के इस छोटे मार्ग के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी छोर 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) का लंबा और सुरक्षित चक्कर लगाकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर भारतीय विमानन क्षेत्र पर भी पड़ा है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और एयरस्पेस बंद होने के कारण 20 जुलाई तक भारतीय एयरलाइंस को अपनी लगभग 26,000 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। इसके अलावा कई उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े और वे भारी देरी का शिकार हुईं।
दूसरी ओर, घरेलू मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को एक बड़ी राजनीतिक सफलता मिली है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने कड़े मुकाबले के बीच 216-214 वोटों से ट्रम्प के 95 अरब डॉलर के भारी-भरकम रक्षा बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मुहर के लिए सीनेट में भेजा जाएगा, जिससे ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए भारी-भरकम वित्तीय फंड सुनिश्चित हो सकेगा।
अमेरिका-ईरान संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी है, जिसके बाद ब्रिटेन और हूती विद्रोहियों की गतिविधियों से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर कार्रवाई करते हुए भारत सहित 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने शुक्रवार को 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की।
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जल्द इस्तीफा देने की चर्चा तेज हो गई है। शेख हसीना की दिसंबर में संभावित वापसी और अदालती फैसलों से देश का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।
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पेंटागन ने माना कि ईरान के हमलों में 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। अमेरिका ने ईरान के 9 शहरों पर हवाई हमले किए, जबकि इजराइल ने युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार किया है।
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