अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष की विस्तृत रिपोर्ट। अमेरिकी हमलों, ट्रंप की परमाणु चेतावनी, 37.5 अरब डॉलर के भारी खर्च और होर्मुज स्ट्रेट विवाद की पूरी जानकारी।

लगातार 11 वें दिन भी ईरान पर अमेरिका ने बमबारी की।
वाशिंगटन डीसी। तेहरान। स्टार समाचार वेब
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक अत्यंत विनाशकारी और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। बुधवार की सुबह अमेरिकी वायुसेना और मिसाइल यूनिट्स ने ईरान के पांच प्रमुख शहरों पर एक साथ भीषण हमले किए। ईरानी अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन हमलों में चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम के टूटने के बाद यह लगातार 11वीं रात है, जब अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरानी ठिकानों पर लगातार बमबारी जारी रखी है। इन ताबड़तोड़ हमलों ने न केवल ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को गहरी चुनौती दी है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और मध्य पूर्व क्षेत्र में युद्ध के और अधिक विस्तार का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सैन्य अभियान को लेकर एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने 'पिकऐक्स माउंटेन' पर बेहद भारी हमला करने की योजना बना रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प के इस आक्रामक बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में भारी हलचल मचा दी है। इस चेतावनी का कड़ा जवाब देते हुए ईरानी नेतृत्व ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका की ओर से हमले इसी तरह जारी रहते हैं, तो वह इस युद्ध के दायरे को पूरे क्षेत्र में फैलाने से पीछे नहीं हटेगा। दोनों देशों के बीच बढ़ती यह तल्खी एक बड़े और भीषण क्षेत्रीय संकट की ओर स्पष्ट इशारा कर रही है।
इस निरंतर जारी सैन्य अभियान के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने युद्ध के वित्तीय बोझ पर अत्यंत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। हेगसेथ के अनुसार, इस युद्ध में अब तक अमेरिका का कुल खर्च बढ़कर 37 अरब 50 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है। यदि इसे भारतीय मुद्रा में बदला जाए, तो यह विशाल राशि लगभग 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। यह भारी-भरकम आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका इस युद्ध में अपनी सैन्य शक्ति के साथ-साथ अपने आर्थिक संसाधनों का भी बड़े पैमाने पर झोंक रहा है। रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद अमेरिका के भीतर भी युद्ध के भारी खर्च को लेकर एक नई और तीखी बहस छिड़ गई है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया। रूबियो ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करने की छूट दी गई, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक अत्यंत खतरनाक मिसाल कायम करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर अपनी शर्तें थोपता है, तो यह केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक संकट बन जाएगा। रूबियो ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज एक वैश्विक समुद्री मार्ग है और यह किसी एक देश की निजी संपत्ति नहीं है, जिसे रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए।
अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए लगातार और सटीक हमलों के बावजूद, ऐसी पुख्ता खबरें सामने आ रही हैं कि ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता को काफी हद तक फिर से बहाल कर लिया है। अमेरिकी समाचार पत्र 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने सैन्य विशेषज्ञों और हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से यह दावा किया है कि ईरान ने अपने कई भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर दोबारा निर्माण और काम शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान न केवल अपनी नष्ट हुई बुनियादी सुविधाओं को तेजी से खड़ा कर रहा है, बल्कि अमेरिकी सेना और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी जारी रखे हुए है। इस खुलासे ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
तनाव के इस विकट माहौल में ईरान के रुढ़िवादी अखबार 'कयहान' ने अमेरिका को एक सीधी और विनाशकारी चेतावनी जारी की है। बुधवार को प्रकाशित अपने लेख में अखबार ने स्पष्ट लिखा कि यदि अमेरिका ने ईरान के 'पिकऐक्स माउंटेन' परमाणु केंद्र या किसी अन्य परमाणु प्रतिष्ठान पर हमला करने का दुस्साहस किया, तो जवाबी कार्रवाई में अमेरिका के परमाणु ठिकानों को भी नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। अखबार ने जोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक अपनी प्रतिरोधक नीति और 'जैसे को तैसा' के सिद्धांत पर पूरी तरह अडिग है। इस तीखी धमकी ने अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु संघर्ष की आशंकाओं को और अधिक गहरा कर दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष की विस्तृत रिपोर्ट। अमेरिकी हमलों, ट्रंप की परमाणु चेतावनी, 37.5 अरब डॉलर के भारी खर्च और होर्मुज स्ट्रेट विवाद की पूरी जानकारी।
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पेंटागन ने माना कि ईरान के हमलों में 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। अमेरिका ने ईरान के 9 शहरों पर हवाई हमले किए, जबकि इजराइल ने युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार किया है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव। खार्ग आइलैंड पर कब्जे की धमकी के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी। जॉर्डन, कुवैत और ओमान में हमलों के बाद वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल में भारी उछाल।
ईरान के दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत में आज यानी रविवार सुबह 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद प्रांतीय प्रशासन ने इमरजेंसी अलर्ट जारी कर राहत और बचाव एजेंसियों को पूरी तरह एक्टिव कर दिया। खुजेस्तान के गवर्नर सैयद मोहम्मद रजा मौलाइजादेह ने बताया कि प्रभावित इलाकों में टीमें भेजी गई हैं और हालात का लगातार जायजा लिया जा रहा है।
बलूचिस्तान के मस्तंग में BLA का पाकिस्तानी सेना के काफिले पर बड़ा हमला। 45 से अधिक सैनिकों के मारे जाने का दावा। जानिए क्यों कमजोर साबित हो रहा है पाकिस्तानी सेना का सुरक्षा तंत्र।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारतीय पक्ष पर देरी का आरोप लगाया है। जानिए प्रोजेक्ट की लागत, शर्तें और ताजा अपडेट।
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव। ईरान का जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा, जबकि अमेरिका ने ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज चुनाव सुरक्षा पर राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक यानी डिक्लासिफाई कर रही है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के ग्रेटर टुनब द्वीप पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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