ईरान की IRGC ने अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट में हमले की चेतावनी दी है। मिसाइलें अमेरिकी ठिकानों पर लॉक हैं। जानें ट्रम्प के 14 सूत्रीय प्रस्ताव और वैश्विक तेल संकट पर इसका असर।

तेहरान/वाशिंगटन। स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन 'इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने अमेरिका को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि फारस की खाड़ी या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी तेल टैंकरों या व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों पर विनाशकारी पलटवार किया जाएगा। ईरान की इस धमकी के बाद वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप मच गया है।

IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक आक्रामक पोस्ट के जरिए दावा किया है कि उनकी मिसाइलें और घातक ड्रोन पहले ही अमेरिकी ठिकानों और दुश्मन के युद्धपोतों पर 'लॉक' किए जा चुके हैं। सेना का कहना है कि वे पूरी तरह से युद्ध की स्थिति में हैं और केवल शीर्ष नेतृत्व से हमले के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर जाने वाले लगभग 70 जहाजों को रोककर उसकी आर्थिक घेराबंदी सख्त कर दी है।
तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने ईरान के सामने 14 बिंदुओं वाला एक शांति प्रस्ताव (ड्राफ्ट) रखा है। हालांकि, ट्रम्प को शनिवार सुबह तक जवाब मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ईरान ने अमेरिका की इस समय सीमा को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने स्पष्ट किया कि वे किसी अमेरिकी डेडलाइन के दबाव में काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और तेहरान अपनी सुविधानुसार और अपने तरीके से इसका जवाब देगा।
ईरान की राजधानी तेहरान में युद्धोन्माद और अमेरिका विरोधी भावनाएं चरम पर हैं। शहर के बीचों-बीच एक विशाल बिलबोर्ड लगाया गया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प की मूंछ को 'होर्मुज स्ट्रेट' के नक्शे के रूप में दिखाया गया है, जो ईरान के रणनीतिक नियंत्रण का प्रतीक है। सोशल मीडिया पर एक महिला की तस्वीर भी वायरल हो रही है, जो इस बिलबोर्ड के सामने गर्व से ईरानी झंडा लहरा रही है। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि ईरान अपनी समुद्री सीमाओं पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

ईरान और अमेरिका के इस टकराव का सीधा असर दुनिया की जेब पर पड़ना शुरू हो गया है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतें उछलकर 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। संयुक्त राष्ट्र और आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह मार्ग बंद होता है या युद्ध छिड़ता है, तो दक्षिण एशिया सहित पूरी दुनिया में ईंधन, खाद्य पदार्थ और अन्य आयातित वस्तुएं बेतहाशा महंगी हो जाएंगी। इस बीच, इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जहाँ हालिया हमलों में 39 लोगों की जान जा चुकी है।
तमाम धमकियों के बीच अगले हफ्ते पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच नई वार्ता होने की संभावना है। इसके साथ ही, अमेरिका की मध्यस्थता में 14-15 मई को इजराइल और लेबनान के बीच भी शांति वार्ता तय की गई है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान ट्रम्प के प्रस्ताव को स्वीकार कर पीछे हटता है या फिर होर्मुज स्ट्रेट में एक नया और भीषण सैन्य संघर्ष शुरू होता है।

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