यामी गौतम और इमरान हाशमी स्टारर 'हक' ओटीटी पर धमाका कर रही है। 1985 के शाह बानो केस पर आधारित इस कोर्टरूम ड्रामा ने नेटफ्लिक्स पर टॉप पोजीशन हासिल की है। जानें फिल्म का रिव्यू और IMDb रेटिंग।
By: Ajay Tiwari
Jan 07, 20266:00 PM
मुंबई | एंटरटेंमेंट डेस्क. स्टार समाचार वेब
सिनेमाघरों में अपनी सादगी से छाप छोड़ने वाली फिल्म 'हक' ने ओटीटी (OTT) की दुनिया में कदम रखते ही इतिहास रच दिया है। 2 जनवरी 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म ने महज कुछ ही दिनों में ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर नंबर-1 की पोजीशन हासिल कर ली है। यामी गौतम और इमरान हाशमी के दमदार अभिनय से सजी यह फिल्म एक ऐसी कानूनी लड़ाई की कहानी है, जिसने पूरे भारत की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था।
'हक' की पटकथा 1985 के ऐतिहासिक शाह बानो केस से प्रेरित है। फिल्म में यामी गौतम ने 'शाजिया बानो' का किरदार निभाया है, जो एक साधारण गृहिणी है। कहानी तब मोड़ लेती है जब उसका पति अब्बास खान (इमरान हाशमी), जो स्वयं एक सफल और रसूखदार वकील है, उसे 'तीन तलाक' देकर घर से निकाल देता है।
शाजिया अपने अस्तित्व और गुजारे भत्ते (Alimony) के लिए समाज और परंपराओं की बेड़ियों को तोड़कर अदालत का दरवाजा खटखटाती है। यह फिल्म न केवल एक महिला के संघर्ष को दिखाती है, बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और न्यायपालिका की भूमिका पर एक गंभीर बहस छेड़ती है।
यामी गौतम: यामी ने शाजिया के किरदार में जान फूंक दी है। एक असहाय महिला से लेकर अदालत में हक की मांग करने वाली निडर शाजिया तक का उनका सफर दर्शकों को भावुक कर देता है। आलोचकों का मानना है कि 'हक' यामी के करियर की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक है।
इमरान हाशमी: अब्बास खान के रूप में इमरान हाशमी ने एक बेहद संयमित और प्रभावी अभिनय किया है। एक अहंकारी पति और कानून के जानकार के तौर पर उनका ग्रे-शेड किरदार फिल्म में तनाव पैदा करने में सफल रहा है।
थिएटर्स में औसत शुरुआत करने वाली इस फिल्म को ओटीटी पर जबरदस्त 'वर्ड ऑफ माउथ' का फायदा मिला है। IMDb पर 8.3 की शानदार रेटिंग के साथ, 'हक' उन चुनिंदा कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्हें मस्ट-वॉच (देखना अनिवार्य) माना जा रहा है। फिल्म के संवाद और अदालती जिरह बेहद सटीक और संवेदनशील हैं, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं।
'हक' केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के साहस और संवैधानिक समानता का एक सशक्त दस्तावेज है। नेटफ्लिक्स पर इसकी नंबर-1 की पोजीशन यह साबित करती है कि दर्शक अब सार्थक और यथार्थवादी सिनेमा को अधिक महत्व दे रहे हैं।