भारतीय ज्ञान प्रणाली-युगों-युगों में अनंत ज्ञान ( Infinite Knowledge Across Eras ) विषय पर यूआईटी, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल के गणित विभाग द्वारा पीएम-ऊषा योजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यशाला का शुभारंभ रजिस्ट्रार प्रो. समर बहादुर सिंह ने किया।

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल के गणित विभाग द्वारा पीएम-ऊषा योजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
भारतीय ज्ञान प्रणाली-युगों-युगों में अनंत ज्ञान ( Infinite Knowledge Across Eras ) विषय पर यूआईटी, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल के गणित विभाग द्वारा पीएम-ऊषा योजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यशाला का शुभारंभ रजिस्ट्रार प्रो. समर बहादुर सिंह ने किया। उद्घाटन एवं तकनीकि सत्र का संबोधित करते हुए श्री सिंह ने आईकेएस की महत्वा पर प्रकाश डालते कहा कि प्रशासन किस प्रकार इसको बढ़ावा दे रहा है। विशेषकर एनईपी-2020 और एआईसीटीई आईकेएस सेल के माध्यम से। यह सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि समग्र विकास पर केंद्रित है, जिसमें नैतिकता, आध्यात्मिकता, और व्यावहारिक कौशल शामिल हैं। आईकेएस गुलामी के दौर में खोई हुई पहचान को पुन: स्थापित कर, भारतीयों में अपनी परंपराओं और गौरव का भाव जगाता है। यह शिक्षा को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़कर सांस्कृतिक विरासत को सहेजता है। इसमें गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा (आयुर्वेद), योग, दर्शन, कला और प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

125 प्रतिभागियों ने कराया था पंजीयन
इस अवसर पर प्रो. नीरज गौर, निदेशक यूआईटी-बीयू और प्रो. रागिनी गोथलवाल उपस्थित रहीं। गणित विभागाध्यक्ष डॉ. गरिमा सिंह ने जानकारी दी कि विभिन्न विषयों से लगभग 125 प्रतिभागियों (मुख्यत: Faculty, पीएचडी विद्वान एवं पीजी छात्र) ने पंजीकरण कराया है। इसके साथ ही उन्होंने सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

समग्र शिक्षा पर रहा फोकस
विविध तकनीकी सत्रों में आईआईटी, एनआईटीटीटीआर, आरजीपीवी आदि संस्थानों से प्रसिद्ध वक्ताओं ने व्याख्यान दिए। आईकेएस के अंतरानुशासनिक अनुप्रयोगों पर चर्चा हुई, जो आलोचनात्मक चिंतन, शोध अभिमुखता और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहे।
15 विजेताओं को कुलपति ने नवाजा
कार्यशाला के दूसरे दिन ज्ञान जिज्ञासा क्विज, पोस्टर निर्माण और रंगोत्सव प्रतियोगिताओं में विजेताओं को 15 पुरस्कार प्रदान किए गए। कुलपति प्रो. एसके जैन ने पुरस्कार वितरित किए। वहीं समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा- आईकेएस हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जो विद्यार्थियों में समग्र विकास लाएगा। वहीं समापन सत्र में प्रो. नीरज गौर ने कार्यशाला का सारांश प्रस्तुत करते हुए इसे अत्यंत सफल बताया।
पुरस्कार विजेताओं की घोषणा
गणित विभागाध्यक्ष डॉ. गरिमा सिंह ने पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार सागर गौतम एमएससी 4th सेम केमिस्ट्री, द्वितीय पुरस्कार विकी कुशवाहा बी फार्मा 1ST ईयर, तृतीय पुरस्कार ओजस तिवारी एमएससी 4th सेम मैथ्स, प्रथम कंसोलेशन प्राइज आसना सेन बीसीए फर्स्ट सेम, सेकंड कंसोलेशन प्राइज कहकशा बानो बी फार्मा 6th सेम चुनी गई।
रंगोली प्रतियोगिता में इन्होंने मारी बाजी
गणित विभागाध्यक्ष डॉ. गरिमा सिंह ने बताया कि रंगोली प्रतियोगिता में संजना गुर्जर और विक्की कुशवाहा एमएससी केमिस्ट्री फर्स्ट प्राइज, सागर गौतम, विजय विश्वकर्मा एमएससी केमिस्ट्री सेकंड प्राइज, सतीश मीणा और अंजलि एमएससी केमिस्ट्री तृतीय पुरस्कार, प्रथम कंसोलेशन दीपाली चतुर्वेदी एमएससी मैथ्स और द्वितीय कंसोलेशन एकता गुप्ता एमएससी मैथ्स रहीं।
आईकेएस के लिए कार्य करने का आह्वान
गणित विभागाध्यक्ष डॉ. गरिमा सिंह ने बताया कि क्वीज प्रतियोगिता में पांच छात्र-छात्राओं में बाजी मारी। इसमें शिखु कुशवाह, श्रेया वर्मा, वर्षा विश्वकर्मा, पंकज कुमार प्रजापति और आकृति शर्मा शामिल हैं। वहीं प्रतिभागियों ने प्रेरित होकर आईकेएस के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया। कार्यशाला ने आलोचनात्मक चिंतन, शोध अभिमुखता एवं अंतरानुशासनिक शिक्षा को मजबूत किया।


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