शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक के लिए उन्हें दोषी बताकर जंतर-मंतर पर 36 दिन से धरना प्रदर्शन चल रहा था।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक के लिए उन्हें दोषी बताकर जंतर-मंतर पर 36 दिन से धरना प्रदर्शन चल रहा था। आंदोलनकारियों का कहना था कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से कम में वह नहीं मानेंगे।
क्या लिखा इस्तीफे में....
मेरे युवा साथियों,
मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूँ। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।
किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।
इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।
पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ न्याय नहीं होने देंगे।
16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।
परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।
मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूँ तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूँ। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।
पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।
भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है।
देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।
जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।
मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूँगा।
प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूँगा।
आपका,
धर्मेंद्र प्रधान
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET-UG) के पेपर लीक विवाद ने आखिरकार एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है. पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी, और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे का पत्र सार्वजनिक किया है. अपने त्यागपत्र में उन्होंने छात्रों के नाम संदेश देते हुए लिखा है कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं. उनका सदैव यह अटूट विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी सशक्त राष्ट्र की असली आधारशिला होती है.
एक्स पर पोस्ट किया इस्तीफा

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के बीच जश्न का माहौल शुरू हो गया। छात्रों ने 'छात्र एकता जिंदाबाद' के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाया। इस दौरान नीट पेपर लीक विवाद के बाद अपनी जान गंवाने वाले विद्यार्थियों की याद में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
उधर, सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच कुछ ही देर में बातचीत शुरू होने वाली है। इस सिलसिले में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह के साथ-साथ सौरभ दास और अभिषेक रांका कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंच चुके हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "क्या कह रहे थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते? झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो चुका है, लेकिन हमारी अभी दो और मांगें बाकी हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "सुबह हो गई मामू, अब जनता जाग चुकी है। हम इतनी आसानी से पीछे नहीं हटने वाले हैं, क्योंकि कॉकरोच एक बार जहां घुस जाता है, आसानी से बाहर नहीं निकलता।" अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि सुसाइड करने वाले बच्चों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए।
सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जाने-माने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने भी प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि, सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर 20 दिन तक अनशन किया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनाम वांगचुक ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- यह लोकतंत्र की जीत है, सीधा लोकतंत्र... जो सड़कों से निकला है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। सीजेपी और देश की 'जेन जी'को बधाई; और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई। जवाबदेही से अब सुधार की ओर।

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