भारत में मार्च के बाद यानी अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश भुगतान पूरी तरह बंद हो जाएगा। केंद्र सरकार ने कहा- एनएचएआई एक अप्रैल से देश भर के नेशनल हाईवे फीस प्लाजा पर कैश ट्रांजैक्शन पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रही है। इस कदम से राजमार्गों पर एक पूर्ण डिजिटल टोलिंग सिस्टम विकसित होगा
By: Arvind Mishra
Feb 21, 20261:31 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत में मार्च के बाद यानी अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश भुगतान पूरी तरह बंद हो जाएगा। केंद्र सरकार ने कहा- एनएचएआई एक अप्रैल से देश भर के नेशनल हाईवे फीस प्लाजा पर कैश ट्रांजैक्शन पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रही है। इस कदम से राजमार्गों पर एक पूर्ण डिजिटल टोलिंग सिस्टम विकसित होगा, जहां टोल भुगतान केवल फास्टैग या यूपीआई के माध्यम से ही होगा। दरअसल, एनएचएआई देश के टोल प्लाजा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। एनएचएआई का उद्देश्य टोल आॅपरेशन को ज्यादा पारदर्शी और सही बनाना है। अभी देश के 1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लागू है।
टोल पर कम हो जाएगी भीड़
एनएचएआई के अनुसार टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट की वजह से अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। खास तौर पर पीक आॅवर्स (भीड़ वाले समय) में नकद लेनदेन के कारण गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती हैं और छुट्टे पैसों को लेकर विवाद भी होते हैं। डिजिटल पेमेंट पूरी तरह अनिवार्य होने से ये समस्या नहीं रहेगी।
98 फीसदी गाड़ियों पर लगा फास्टैग
देश में फास्टैग का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल 98 फीसदी से ज्यादा वाहनों में फास्टैग लगा हुआ है। एनएच शुल्क नियमों के मुताबिक, अगर कोई वाहन बिना एक्टिव फास्टैग के टोल प्लाजा की फास्टैग लेन में जाता है और नकद भुगतान करता है, तो उससे दोगुना टोल वसूला जाता है। वहीं, अगर कोई यूजर यूपीआई के जरिए भुगतान करता है, तो उसे लागू टोल दर का 1.25 गुना चार्ज देना होता है।
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