सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर देशभर के प्रसिद्ध ज्योतिलिंर्गों और प्रमुख शिव मंदिरों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भस्म आरती से लेकर देर रात से ही उज्जैन के महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर और बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही।

ओंकारेश्वर में भक्तों ने किया बाबा का रूद्राभिषेक
भोजेश्वर महादेव को छह क्विंटल फूलों से सजाया
रुद्राभिषेक और पूजन के बाद दर्शन के लिए खुले पट
काशी, अयोध्या और प्रयागराज के मंदिरों में रही भीड़

भोपाल/नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर देशभर के प्रसिद्ध ज्योतिलिंर्गों और प्रमुख शिव मंदिरों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भस्म आरती से लेकर देर रात से ही उज्जैन के महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर और बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर भगवान शिव का स्वागत किया गया। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 2:30 बजे भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट खोले गए। कर्पूर आरती और पंचामृत स्नान के बाद बाबा महाकाल का चांदी के त्रिशूल, रजत मुकुट, मुंडमाल, रुद्राक्ष, भांग, चंदन और सूखे मेवों से अद्भुत श्रृंगार किया गया। कांवड़ियों के निरंतर जलार्पण के बीच भगवान शिव की भव्य सवारी निकाली गई।

काशी में भक्तों पर पुष्प वर्षा
काशी के विश्वनाथ धाम मंदिर में सुबह 4 बजे मंगला आरती के बाद भक्तों के लिए 6 प्रवेश द्वारों से कपाट खोले गए। 2 किलोमीटर लंबी कतारों के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पूरे मंदिर परिसर की निगरानी ड्रोन कैमरों से की गई और भक्तों पर पुष्प वर्षा की गई।
बैद्यनाथ धाम में लगी कतार
झारखंड स्थित देवघर यानी बाबा बैद्यनाथ धाम में तड़के 3:15 बजे मंदिर के कपाट खुले और पूजन के बाद 4:10 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। बाबा के जलार्पण के लिए करीब 4 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही।
ओंकारेश्वर में पारंपरिक सवारी
मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर-ममलेश्वर मंदिर में सावन सोमवार पर तीर्थनगरी पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। भगवान शिव के नौका विहार और पारंपरिक सवारी के दौरान पुलिस बैंड, सात ढोल बैंड और झांकियों के साथ हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई।

भोजेश्वर महादेव का मनमोहक श्रृंगार
भोपाल से लग भोजपुर मंदिर में महाकालेश्वर स्वरूप में सजाए गए भोजेश्वर महादेव का करीब 6 क्विंटल सुगंधित फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। महंत पवन गिरि महाराज द्वारा रुद्राभिषेक और पूजन के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
हजारेश्वर-मोटे महादेव
मान्यता के अनुसार यहां जलाभिषेक करने पर हजार गुना पुण्य प्राप्त होता है। अंतिम सोमवार पर ग्वालियर और आसपास के जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर शिव के जयकारे से गूज उठा।
कुंडेश्वर धाम रुद्राभिषेक
टीकमगढ़ में रिमझिम बारिश के बीच तड़के 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में कुंडेश्वर धाम में भोलेनाथ का भव्य रुद्राभिषेक किया गया। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी लाइनें लगी रहीं। वहीं आगर-मालवा के बाबा बैजनाथ मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में प्रशासनिक अधिकारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक और पंचामृत पूजन किया।

सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर देशभर के प्रसिद्ध ज्योतिलिंर्गों और प्रमुख शिव मंदिरों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भस्म आरती से लेकर देर रात से ही उज्जैन के महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर और बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही।
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