मध्यप्रदेश के निकाय चुनावों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने में होने वाले खर्च की लिमिट तय करने का फैसला किया है। आयोग ने सभी बदलाव का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

मध्यप्रदेश के निकाय चुनावों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के निकाय चुनावों में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने में होने वाले खर्च की लिमिट तय करने का फैसला किया है। आयोग ने सभी बदलाव का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष के साथ पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक केसों की पूरी जानकारी शपथ पत्र में देनी होगी। साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव के तर्ज पर हर दिन चुनावी खर्च का ब्यौरा आयोग को देना होगा। अगर जानकारी नहीं दी तो उम्मीदवारी निरस्त कर दी जाएगी। दरअसल, आयोग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि चुनाव लड़ने वाले महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, पार्षद पद के उम्मीदवार को अपनी खुद, पत्नी या पति और तीन बच्चों की आमदनी और चुकाए जाने वाले टैक्स की जानकारी भी देना होगी। यह भी बताना होगा कि उसकी आय का साधन क्या है।
अधिकांश चुनाव 2027 में होंगे
उम्मीदवारों के चुनाव खर्च की लिमिट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के परामर्श से तय की जाएगी। प्रदेश के नगर निकायों में महापौर, नगर पालिका एवं नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के चुनाव पांच साल में होते हैं। कुछ नगरपालिका और नगर परिषदों को छोड़ 90 फीसदी निकायों में यह चुनाव 2027 में होंगे। इसके पहले 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निकायों में चुनाव कराए गए थे। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने आदेश जारी किया है। जिसके तहत पार्षद पद के उपचुनाव भी नई व्यवस्था से होंगे।
कोर्ट में चल रहे केस भी देना होगा ब्यौरा
उल्लेखनीय है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार जिस तरह से सोशल मीडिया अकाउंट, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर की डिटेल देते हैं। उसी तरह इन्हें भी जानकारी देना होगा। आयोग को बताना होगा कि दो साल या अधिक समय की सजा वाले कितने आपराधिक केस उन पर दर्ज हैं। इसकी थाने में दर्ज एफआईआर, थाना और जिला का ब्यौरा बताने के साथ न्यायालय में चल रहे केस और अन्य ब्यौरे देने होंगे।
घर के शौचालय की भी देंगे जानकारी
यही नहीं, संयुक्त स्वामित्व वाली चल और अचल संपत्ति की जानकारी भी शपथ पत्र में देना तय किया गया है। साथ ही उम्मीदवार द्वारा शेयर और कंपनियों में किए गए निवेश का ब्यौरा भी देना होगा। साथ ही कितना कर्ज लिया और दिया गया है। किन सरकारी एजेंसियों का कितना बकायादार उम्मीदवार है, इसकी जानकारी देने का प्रावधान भी इसमें किया गया है। आयोग ने यह भी साफ किया है कि उम्मीदवार अपने घर पर लगे फ्लश शौचालय और जलवाहित शौचालय की भी लिखित जानकारी देंगे।
चुनाव खर्च की लिमिट होगी तय
आयोग का कहना है कि चुनाव में किस तरह से धन बल का उपयोग किया जाता है, इससे वाकिफ हैं। इसलिए नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा आयोग के साथ चर्चा कर चुनाव में होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा भी तय की जाएगी। आयोग के उम्मीदवारों द्वारा जो खर्च किया जाएगा और उसका भुगतान किया जाएगा उसकी पूरी डिटेल दी जाएगी। चुनाव खर्च का एक अलग रजिस्टर बनाया जाएगा। चुनाव खर्च की जानकारी तीस दिन के भीतर देना भी अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था भी की गई है कि प्रत्याशी के चुनावी खर्च की जानकारी कोई भी व्यक्ति दस रुपए की फीस जमा करके ले सकेगा।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

मध्यप्रदेश: बैंक ऑफ बड़ौदा ब्लैक लिस्ट... सरकारी लेनदेन पर प्रतिबंध

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमि-पूजन, 5657 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, पीएम आवास योजना और कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों पर विस्तृत रिपोर्ट।
सीधी के खैरा गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हुए, जबकि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सिंगरौली की अमलोरी कोल माइंस में डंपर 100 फीट गहरी खाई में गिरने से ऑपरेटर की मौत हो गई। हादसे ने खदानों में श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवार पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तिरपाल और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मुआवजा मिलने के बावजूद स्थायी पुनर्स्थापन और बुनियादी व्यवस्थाओं का इंतजार जारी है।
रीवा के सेमरिया स्थित पीएम श्री पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के लिए आई किताबें और शैक्षणिक सामग्री कबाड़ में बेचने का आरोप लगा है। मामले का वीडियो सामने आने के बाद जवाबदेही पर सवाल उठे हैं।
रीवा में प्रवर्तन निदेशालय ने चार प्रमुख संविदाकारों के घर और कार्यालयों पर छापेमार कार्रवाई की। वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर भुगतान और कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सतना के धवारी स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में बिना मीटर सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली उपयोग का मामला सामने आया। बिजली विभाग की जांच में अवैध कनेक्शन पकड़े गए, जिससे निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए।
चित्रकूट में 36.84 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कामदगिरी परिक्रमा मार्ग की गुणवत्ता जांच में खामियां मिलीं। कलेक्टर और प्राधिकरण अध्यक्ष ने मौके पर निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया।
सतना जिला अस्पताल के लेबर रूम में अजगर का बच्चा मिलने से अफरा-तफरी मच गई। घटना ने अस्पताल की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सतना जिले में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। जरूरत के मुकाबले केवल एक-तिहाई खाद उपलब्ध है, जबकि डीएपी का स्टॉक बेहद सीमित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।