अधिक मास में तीन दशक के बाद आए दुर्लभ संयोग वाली सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी ओंकारेश्वर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आधी रात से सभी घाटों पर हर-हर नर्मदे की गूंज और मां नर्मदा के जयकरे सुनाई दे रहे थे। लाखों लोगों ने पवित्र नर्मदा नदी में स्नान कर भगवान ओंकारेश्वर एवं भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

श्रद्धालुओं ने ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के किए दर्शन
ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान के लिए भक्तों का उमड़ा सैलाब
भीषण गर्मी के बावजूद घाटों और मंदिरों में भारी भीड़ रही

भोपाल। स्टार समाचार वेब
अधिक मास में तीन दशक के बाद आए दुर्लभ संयोग वाली सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी ओंकारेश्वर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आधी रात से सभी घाटों पर हर-हर नर्मदे की गूंज और मां नर्मदा के जयकरे सुनाई दे रहे थे। लाखों लोगों ने पवित्र नर्मदा नदी में स्नान कर भगवान ओंकारेश्वर एवं भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भीषण गर्मी और 44 डिग्री के आसपास पहुंच चुके तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और श्रद्धा में कोई कमी दिखाई नहीं दी। दरअसल, रविवार रात से ही भक्तों के ओंकारेश्वर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो सोमवार को जारी रहा। धर्मनगरी की सड़कें, घाट, मंदिर परिसर और प्रमुख मार्ग श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। नगर का ऐसा कोई स्थान नहीं था जहां श्रद्धालुओं की उपस्थिति नजर न आ रही हो।
अमावस्या का दुर्लभ संयोग
अधिक मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग 30 साल बाद बना है। हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। ऐसे में अधिक मास और सोमवती अमावस्या का एक साथ पड़ना इस पर्व की धार्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है। इस शुभ अवसर पर नर्मदा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप एवं भगवान शिव के दर्शन का विशेष फल प्राप्त होता है।
घाटों पर दिनभर रही श्रद्धालुओं की भीड़
सोमवती अमावस्या पर नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सबसे अधिक भीड़ नर्मदा-कावेरी संगम घाट, नगर घाट, अभय घाट एवं खेड़ी घाट पर देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त से ही स्नान प्रारंभ कर पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
दर्शन व्यवस्था में किए गए बदलाव
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई। मंदिर के समीप सुखदेव द्वार और जूना द्वार क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी होने के कारण नए झूला पुल से आवागमन बंद रखा गया। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पुराने झूला पुल से मंदिर तक पहुंचाया गया।
प्रशासन को करना पड़ा विशेष प्रबंध
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण प्रशासन और पुलिस को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधिया ने बताया कि बड़ी संख्या में छोटे वाहनों के पहुंचने से नगर क्षेत्र में यातायात का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़े वाहनों का प्रवेश इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर प्रतिबंधित किया गया तथा नगर के कई मार्गों पर वन-वे व्यवस्था लागू की गई। पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने में जुटी रही।
आस्था के आगे गर्मी छूटी पीछे
निमाड़ अंचल में भीषण गर्मी बरकरार है। इसके बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। सुबह से लेकर दोपहर तक श्रद्धालु नर्मदा स्नान और ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए कतारों में खड़े रहे। अमावस्या के इस पावन अवसर पर ओंकारेश्वर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने धर्मनगरी को पूर्णत: आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर कर दिया।


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