धार्मिक नगरी उज्जैन में रक्षाबंधन का पर्व दिव्य आस्था और परंपरा के साथ शुरू हुआ। मान्यता अनुसार, देश की पहली राखी जगत के स्वामी भगवान महाकाल को अर्पित की गई। तड़के 3 बजे आयोजित प्रसिद्ध भस्म आरती में पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को विशेष रूप से हस्तनिर्मित राखियां बांधीं।

शैव-वैष्णव परंपरा का संगम, परंपरा और भक्ति की झलक
उज्जैन में पुजारी परिवार की महिलाओं ने निभाई परंपरा

उज्जैन। स्टार समाचार वेब
धार्मिक नगरी उज्जैन में रक्षाबंधन का पर्व दिव्य आस्था और परंपरा के साथ शुरू हुआ। मान्यता अनुसार, देश की पहली राखी जगत के स्वामी भगवान महाकाल को अर्पित की गई। तड़के 3 बजे आयोजित प्रसिद्ध भस्म आरती में पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को विशेष रूप से हस्तनिर्मित राखियां बांधीं। इस बार बाबा को कुल 6 विशेष राखियां अर्पित की गईं। मुख्य राखी 1.5 से 2 फीट विशाल थी, जिसे रागिनी शर्मा एवं पुजारी परिवार ने एक सप्ताह की कठिन साधना और मंत्रोच्चार के बीच तैयार किया। इसमें रुद्राक्ष, त्रिनेत्र, ॐ, त्रिपुंड के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण के मोर पंख और गौ माता के प्रतीक शामिल रहे।
रात 2 बजे मंदिर प्रवेश
पुजारी ओम शर्मा, राजेश शर्मा और आकाश गुरु के परिवार की महिलाएं रात 2 बजे ही गर्भगृह पहुंचीं। भस्म अर्पित होने के बाद बाबा को राखी बांधी गई, जिसके बाद महिलाओं ने मंदिर के प्रसाद से अपना उपवास तोड़ा। राखी को आकर्षक बनाने के लिए इसमें कांच वर्क, मोर पंख और रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया गया है।
भक्तों का महासैलाब
श्रावणी पूर्णिमा और भस्म आरती के इस पावन संयोग पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उमड़े। समूचा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गुंजायमान रहा। महाकाल के आंगन से शुरू हुआ यह रक्षापर्व पूरे देश में सुख, समृद्धि-लोक-कल्याण की कामना के साथ मनाया जा रहा है।
लड्डुओं का महाभोग: भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा महाकाल को शुद्ध देसी घी और बेसन से बने सवा लाख महाकालेश्वर प्रसादी लड्डुओं का भोग लगाया गया।
व्रत का पारण: श्रावण मास भर उपवास रखने वाले श्रद्धालु महाकाल को अर्पित इस प्रसादी को ग्रहण कर अपना व्रत खोलते हैं।
रक्षासूत्र का निर्माण: राखी बनाने वाली पुजारी परिवार की महिलाओं ने पूरे श्रावण माह व्रत रखा। निर्माण प्रक्रिया के दौरान वे निरंतर ॐ नम: शिवाय और जय महाकाल का जाप करती रहीं।


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