अमेरिका-ईरान के बीच भले ही संघर्षविराम लागू है, लेकिन कई मौकों पर ऐसी खबरें आती है, जिससे ये संघर्षविराम टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। अब अमेरिकी न्यूज चैनल की तरफ से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ईरान के विमानों को अपने एयरबेस पर छिपा कर उन्हें अमेरिकी हमलों से बचाया है।

यूएस-ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी रिपोर्ट से मचा भूचाल
पाक ने ईरानी को एयरबेस पर खड़ा करने की अनुमति दी
वॉशिंगटन। स्टार समाचार वेब
अमेरिका-ईरान के बीच भले ही संघर्षविराम लागू है, लेकिन कई मौकों पर ऐसी खबरें आती है, जिससे ये संघर्षविराम टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। अब अमेरिकी न्यूज चैनल की तरफ से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ईरान के विमानों को अपने एयरबेस पर छिपा कर उन्हें अमेरिकी हमलों से बचाया है। अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान में से किसी ने भी आधिकारिक तौर पर इन दावों की पूरी पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस रिपोर्ट के बाद क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने एयरफील्ड पर पार्क करने की इजाजत दी थी। यह मदद शायद उन्हें अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए दिया गया था।
ईरानी सांसद बोले- अमेरिका के पक्ष में झुका पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के लायक नहीं
विमान नूर खान एयर बेस पर भेजे थे
रिपोर्ट के अनुसार दो अधिकारियों ने बताया कि, ईरान ने अफगानिस्तान में भी अपने सिविल विमान पार्क करने के लिए भेजे थे। हालांकि इसमें लड़ाकू विमान भी शामिल थे या नहीं। नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में जब ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का एलान किया था, उसके कुछ ही दिनों बाद तेहरान ने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस पर भेजे थे।
इस्लामाबाद की भूमिका पर सवाल
वहीं, दूसरी तरफ
के एक सीनियर अधिकारी ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। इसके साथ ही अफगानिस्तान के सिविल एविएशन के एक अधिकारी ने बताया कि जंग शुरू होने से ठीक पहले, महान एयर का एक ईरानी सिविल विमान काबुल में उतरा था। हालांकि, तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी विमान की मौजूदगी से साफ इंकार कर दिया है।
मध्यस्थ भूमिका की समीक्षा जरूरी
सब विवादों के बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस्लामाबाद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए, मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान के अब तक के सभी कामों की पूरी तरह से समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा- अगर यह रिपोर्ट सच है, तो अमेरिका, ईरान और दूसरे पक्षों के बीच मध्यस्थ की जो भूमिका पाकिस्तान निभा रहा है, उसकी पूरी तरह से नए सिरे से समीक्षा करना जरूरी है। इजरायल के प्रति पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के कुछ पुराने बयानों को देखते हुए, अगर यह बात सच निकलती है, तो मुझे जरा भी हैरानी नहीं होगी।
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