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ज्योतिषीय विज्ञान और आध्यात्म का जीवंत उदाहरण है मप्र का ये अनूठा मंदिर 

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित नवग्रह मंदिर अपने आप में अनोखा और अद्भुत है। ये सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ज्योतिषीय विज्ञान और आध्यात्म का जीवंत उदाहरण है।

By: Manohar pal

May 20, 202510:43 PM

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ज्योतिषीय विज्ञान और आध्यात्म का जीवंत उदाहरण है मप्र का ये अनूठा मंदिर 

सितारों के हिसाब से बैठे हैं भगवान, हर मूर्ति में छिपा है चमत्कारी रहस्य

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित नवग्रह मंदिर अपने आप में अनोखा और अद्भुत है। ये सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ज्योतिषीय विज्ञान और आध्यात्म का जीवंत उदाहरण है। यह मंदिर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में अनोखा है, क्योंकि इसकी रचना और स्थापत्य पूरी तरह ज्योतिष शास्त्र के मानकों पर आधारित है। यही कारण है कि यह स्थल न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि शोधकतार्ओं और ज्योतिषाचार्यों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

कुंदा नदी के तट पर स्थित यह मंदिर लगभग 300 वर्षों पुराना है यहां सिर्फ सूर्यदेव और नवग्रह नहीं, बल्कि उनके साथ विराजमान हैं मां बगलामुखी, जिनकी उपस्थिति इसे पीताम्बरा शक्तिपीठ का दर्जा देती है श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां नवग्रहों की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा और दान पोटली अर्पित करने से ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।

इस अद्भुत धरोहर की शुरुआत
मंदिर के पुजारी आचार्य लोकेश जागीरदार के अनुसार उनके छठी पीढ़ी के पूर्वज शेषप्पा को मां बगलामुखी ने स्वप्न में दर्शन दिए थे। उसके बाद उन्होंने इस मंदिर का निर्माण शुरू किया। पूरी तरह ज्योतिषीय नियमों और धार्मिक तात्त्विक संतुलन के आधार पर। गर्भगृह 20 फीट गहराई में है, जहां रथ पर सवार सूर्यदेव और अन्य नवग्रह सूर्यचक्र और ब्रह्मास्त्र के साथ विराजित हैं।
 

त्रिदेवों की ऊर्जा से जुड़ी है मंदिर की संरचना
यह भारत का एकमात्र ऐसा नवग्रह मंदिर है, जहां तीन बराबर के शिखर हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं। ये शिखर गृहशांति मंत्रों के आधार पर स्थापित किए गए हैं। गर्भगृह में सूर्य के साथ शनि, गुरु और मंगल ग्रह की प्रतिमाएं उनके वाहनों, रत्नों और अस्त्र-शस्त्रों के साथ विराजमान हैं।


दक्षिण भारतीय शैली की अद्भुत मूर्तिकला
पूरे मंदिर का स्थापत्य और मूर्तिकला दक्षिण भारतीय शैली में है। हर ग्रह की मूर्ति अपने ग्रह यंत्र, मंडल, और शक्ति के प्रतीकों के साथ स्थापित की गई है। मंदिर के आसपास सरस्वती, शिव, विष्णु और सूर्यकुंड भी स्थित हैं, जो इसे तीर्थ स्थल का रूप प्रदान करते हैं।


इस अनुसार बनी है मंदिर की बनावट
मंदिर में प्रवेश करते ही यह साफ दिखता है कि इसकी बनावट केवल आस्था नहीं, ज्योतिषीय तर्कों से भी जुड़ी है। प्रवेश द्वार पर 7 सीढ़ियां सप्ताह के 7 दिनों का प्रतीक हैं। गर्भगृह में उतरने और चढ़ने के लिए 12-12 सीढ़ियां बनाई गई हैं, जो 12 राशियों और 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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