प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल सोमनाथ मंदिर के 'अमृत महोत्सव' में शामिल होंगे। जानें सोमनाथ मंदिर पर गजनवी के हमले का इतिहास और पीएम मोदी की सोमनाथ यात्राओं का पूरा ब्योरा।

फाइल फोटो
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सौराष्ट्र की पावन तटरेखा पर स्थित भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ महादेव मंदिर का इतिहास अटूट श्रद्धा और अदम्य साहस का प्रतीक है। यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का गवाह भी रहा है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल, 11 मई को सोमनाथ मंदिर पहुंचेंगे। वे यहाँ आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह महोत्सव देश के तत्कालीन प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री, जो सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, इस दौरान मंदिर में 'विशेष महा पूजा', 'कुंभाभिषेक' और 'ध्वजारोहण' जैसे धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न करेंगे।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास विदेशी आक्रांताओं के बर्बर हमलों और भारतीय राजाओं द्वारा इसके बार-बार पुनर्निर्माण की कहानी है। विशेष रूप से, 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा किए गए हमले को अब पूरे 1000 साल हो चुके हैं। इतिहास के पन्नों के अनुसार, 6 जनवरी 1026 को गजनवी ने 30,000 सैनिकों के साथ हमला किया था, जिसमें मंदिर की रक्षा करते हुए 50,000 से अधिक श्रद्धालु वीरगति को प्राप्त हुए थे। गजनवी ने न केवल मंदिर के शिवलिंग को खंडित किया, बल्कि करीब 6 टन सोना और 2 करोड़ दीनार की संपत्ति भी लूट ली थी। इस हमले की सहस्राब्दी को चिह्नित करने के लिए इस वर्ष 8 से 11 जनवरी तक 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का भव्य आयोजन किया गया था, जो भारत की अटूट आस्था को समर्पित था।
भारतीय जनता पार्टी और सोमनाथ मंदिर का गहरा वैचारिक संबंध रहा है। अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन की आधारशिला रखने वाली ऐतिहासिक ‘राम रथ यात्रा’ 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से ही शुरू की गई थी। इसके अतिरिक्त, 31 अक्टूबर 2001 का दिन भी ऐतिहासिक रहा, जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और एल.के. आडवाणी के साथ सोमनाथ पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ मनाई थी। सोमनाथ की यह धरती हमेशा से ही भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना का केंद्र बिंदु रही है।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का सोमनाथ से नाता निरंतर गहरा होता गया है। 18 जनवरी 2021 को उन्हें सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। तब से लेकर अब तक वे कई बार मंदिर के दर्शन और विकास कार्यों का हिस्सा रहे हैं। 2 मार्च 2025 को उन्होंने यहाँ पूजा-अर्चना और रुद्र अभिषेक किया था, जबकि 20 अगस्त 2021 को उन्होंने डिजिटल माध्यम से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी। प्रधानमंत्री के रूप में उनका पहला दौरा 8 मार्च 2017 को हुआ था। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री रहते हुए 1 फरवरी 2014 को उन्होंने मंदिर के स्वर्ण शिखर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया था। उनकी आगामी यात्रा भी इसी भक्ति और विकास के संकल्प की एक कड़ी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ वह पवित्र स्थान है जहाँ चंद्रमा (सोम) ने भगवान शिव की तपस्या कर उनके श्राप से मुक्ति पाई थी। यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की अंतिम लीलाओं का भी साक्षी माना जाता है। मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि इसे सतयुग में सोने, त्रेतायुग में चांदी, द्वापर में लकड़ी और कलियुग में पत्थर से निर्मित किया गया था। वर्तमान मंदिर 'कैलाश महामेरु प्रसाद शैली' का अद्भुत नमूना है, जिसका शिखर 155 फीट ऊंचा है। इस शिखर पर स्थित कलश का भार 10 टन है और ध्वजदंड 27 फीट ऊंचा है। मंदिर परिसर के समीप ही अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित मंदिर भी स्थित है, जो सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) का दिन मेष से मीन राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा? जानिए करियर, व्यापार, स्वास्थ्य और प्रेम जीवन से जुड़ा विस्तृत राशिफल।
जानिए 25 सितंबर 2026 का विस्तृत दैनिक पंचांग। जानें शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि, शतभिषा नक्षत्र, राहुकाल, अभिजीत मुहूर्त और अनंत चतुर्दशी व गणेश विसर्जन का शुभ समय।
25 सितंबर 2026 का मूलांक फल (Ank Jyotish 25 September 2026) पढ़ें। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन, जानिए करियर, धन और स्वास्थ्य का हाल।
24 सितंबर 2026 का राशिफल। जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा गुरुवार का दिन। पढ़ें व्यापार, धन, करियर और स्वास्थ्य का सटीक भविष्यफल
जानिए 24 सितंबर 2026 गुरुवार का पूरा पंचांग, जिसमें शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र, शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त) और राहुकाल का समय शामिल है।
24 सितंबर 2026 का मूलांक फल (Mulank Phal 24 September 2026) पढ़ें। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन, जानिए करियर, धन और स्वास्थ्य का हाल।
अंक ज्योतिष के अनुसार 23 सितंबर 2026 का दिन मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए कैसा रहेगा? जानिए करियर, धन, और स्वास्थ्य से जुड़ा विस्तृत भविष्यफल।
पढ़ें 23 सितंबर 2026 का संपूर्ण राशिफल। मेष से मीन राशि तक सभी राशियों के लिए जानिए करियर, व्यापार, स्वास्थ्य और प्रेम जीवन से जुड़ी भविष्यवाणियां।
जानिए 23 सितंबर 2026, बुधवार का पूरा हिंदू पंचांग। यहाँ पढ़ें आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और शुभ-अशुभ मुहूर्त की विस्तृत जानकारी।
22 सितंबर 2026 का संपूर्ण दैनिक पंचांग। जानिए आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और अशुभ राहुकाल का समय हिंदी में।