लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के जवाब के बाद एंटी पेपर लीक बिल संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित। जानिए इस नए सख्त कानून से जुड़ी पूरी और विस्तृत जानकारी।

संसद के सत्र के दौरान देश में लगातार सामने आ रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों पर नकेल कसने के लिए लाए गए सख्त कानून को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में 'एंटी पेपर लीक बिल' (पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स बिल) पर हुई चर्चा का विस्तृत जवाब दिया। विपक्ष के भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच इस महत्वपूर्ण विधेयक को आवश्यक संशोधनों के साथ लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सरकार का दावा है कि यह कानून युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए और देश के विभिन्न राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सदन में जवाब मांगा। विपक्ष के इन तमाम तीखे सवालों और आरोपों का खंडन करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए कानून का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि परीक्षा माफियाओं और सॉल्वर गैंग्स पर आजीवन शिकंजा कसना है जो मेहनती छात्रों के सपनों पर पानी फेरते हैं। हालांकि, मंत्री के जवाब के दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी और हंगामा जारी रखा। भारी शोर-शराबे और विरोध के बीच ही लोकसभा ने इस विधेयक को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
हंगामे के माहौल के बीच ही लोकसभा ने कुछ जरूरी संशोधनों के साथ इस विधेयक पर मुहर लगा दी। सदन में यह बिल अंततः ध्वनिमत से पारित हो गया। इस नए कानून के लागू होने के बाद सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल, प्रश्नपत्र लीक करने और फर्जीवाड़े में लिप्त पाए जाने वाले दोषियों के खिलाफ बेहद कड़े प्रावधान लागू होंगे। इसमें भारी-भरकम जुर्माने के साथ-साथ लंबी जेल की सजा का भी कड़ा प्रावधान तय किया गया है, जिससे संगठित अपराध के रूप में पनप रहे परीक्षा माफियाओं में खौफ पैदा किया जा सके।
इस विधेयक के पारित होने के साथ ही सरकार ने यह साफ संदेश दे दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की धांधली या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देश के युवाओं का सिस्टम से भरोसा कायम रखने के लिए यह कानून एक मजबूत हथियार बनेगा। इस कानून के दायरे में यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग और विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी तमाम केंद्रीय और स्वायत्त एजेंसियां आ जाएंगी। लोकसभा की इस मुहर के बाद अब यह कानून देश में परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगा।
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