रीवा के एपीएस विश्वविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में समिति बदलने से विवाद गहरा गया है। पात्रता, दस्तावेजों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में पेच फंस गया है। पहले कुलपति ने जिस प्रोफेसर के नेतृत्व में कमेटी गठित की थी। उसने गलत तरीके से प्रमोशन देने से इंकार कर दिया। 16 कर्मचारियों ने जो रिकार्ड प्रमोशन में लगाए। उस पर आपत्ति दर्ज की गई। प्रमोशन का मामला अटकते देख, प्रबंधन ने कमेटी हेड को ही बदल दिया। उन्हें मेडिकल लीव में भेज दिया। अब चहेतों से मनमानी कराने की तैयारी है।
शासन के आदेश के बाद अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में भी कर्मचारियो को पदोन्नति देने की तैयारियां शुरू कर दी गई है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के विभागीय पदोन्नति संबंधी प्रकरणों की जांच करने के लिए विवि के कुलपति प्रो राजेन्द्र प्रसाद कुड़रिया के निर्देश पर कुलसचिव ने कमेटी का गठन किया था। इसकी संयोजक प्रो शुभा तिवारी को बनाया गया था। अचानक से उन्हें बदल दिया गया। उनकी जगह पर विवि प्रबंधन ने प्रो आरएन पटेल विभागाध्यक्ष रसायन शास्त्र को संयोजक बना दिया। प्रो शुभा तिवारी को बाहर कर दिया गया।
वहीं सदस्य की जगह पर डॉ रामभूषण मिश्र संचालक और विभागाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा विभाग को शामिल कर दिया गया है। इस बदलाव को लेकर विवि में चचार्एं तेज हो गई हैं। डॉ रामभूषण मिश्रा को कुलपति का खास माना जाता है। वहीं प्रो आरएन पटेल भी कुलपति के ही गुट के बताए जाते हैं। इनकी मौजूदगी में कर्मचारियों की रुकी पदोन्नति आसानी से निपट जाएगी। वहीं जिन मामलों में पूर्व संयोजक ने आपत्ति लगाई थी, उन्हें भी किनारे कर दिया जाएगा।
पहले कुछ इस तरह से बनी थी विचार एवं अनुशंसा समिति
इस कमेटी में संयोजक प्रो शुभा तिवारी, आचार्य अंग्रेजी विभाग, सदस्य में आचार्य और विभागाध्यक्ष रसायन विभाग प्रो आरएन पटेल, प्रो श्रीकांत मिश्र विभागाध्यक्ष दर्शनशास्त्र, आरडी चौधरी वित्त नियंत्रक, बाबूलाल साकेत सहायक कुलसचिव गोपनीय शामिल थे। इसके अलावा प्रस्तुतकर्ता अधिकारी सहायक कुलसचिव कार्मिक को बनाया गया था।
बुद्धसेन ने डिप्टी रजिस्ट्रार को पहनाई थी जूतों की माला
विवि प्रबंधन उस कर्मचारी नेता को भी पदोन्नति देने की तैयारी में है। जिसने विवि की बदनामी की थी। रिटायरमेंट के दिन ही डिप्टी रजिस्ट्रार लाल साहब सिंह को जूतों की माला पहनाने की कोशिश की गई थी। इस मामले में शासन स्तर तक शिकायत हुई थी। तत्कालीन एसीएस ने मामले में तत्कालीन कुलपति डॉ राजकुमार आचार्य को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस मामले में टीम भी बनाई गई थी। प्रो सीडी सिंह ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट भी सौंप दी थी। सालों गुजर गए लेकिन लिफाफा नहीं खुला। विवादित कर्मचारी अध्यक्ष बुद्धसेन को भी प्रमोशन देने की तैयारी चल रही है। इस पर भी प्रो शुभा तिवारी ने आपत्ति दर्ज की थी।
बिना अनुमति दी परीक्षा, अब उसी अंकसूची से प्रमोशन लेने जा रहे
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रमोशन में बड़ी गड़बड़ियां हैं। कई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ऐस हैं, जिन्होंने 12वीं की उर्दू बोर्ड से अंकसूची लगाकर पदोन्नति की मांग की है। कईयों ने कॉलेज की डिग्री भी ले ली, जबकि पढ़ाई के लिए न तो उन्होंने अवकाश लिया और न ही परीक्षा देने के लिए विवि से अनुमति ही ली। पदोन्नति के लिए दावेदारी करने वाले 16 कर्मचारियों की अंकसूची उर्दू बोर्ड की है। इसी का प्रो शोभा तिवारी ने विरोध और आपत्ति दर्ज की थी। ऐसे कर्मचारियों को पदोन्नत देने से भी उन्होंने इंकार कर दिया था। यही वजह है कि प्रबंधन ने उन्हें कमेटी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया।


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