सतना में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत बनने वाली आयुष विंग एक बार फिर विवादों में। खोवा मंडी के पास प्रस्तावित भवन स्थल पर स्थित हनुमान मंदिर को लेकर ड्राइंग-डिजाइन में आ रहा है बदलाव का पेंच। पिछले 4 साल से रुकी परियोजना के दोबारा टेंडर होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। आयुष संचालनालय को भेजा गया डिजाइन परिवर्तन का प्रस्ताव। जानिए पूरी रिपोर्ट।

4 साल ठप रही ‘विंग’, दोबारा टेंडर के बाद भी निर्माण शुरू नहीं, ड्राइंग बदलने आयुष संचालनालय को लिखा पत्र
सतना, स्टार समाचार वेब
राष्ट्रीय आयुष मिशन अर्न्तगत आयुष विंग तैयार कर पंचकर्म की सुविधा देने का प्लान कागजों से बाहर नहीं आ रहा है। सतना में राष्ट्रीय आयुष मिशन पिछले 4 सालों से अटका हुआ है, वहीं असाध्य रोगियों का दर्द दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। एक बार फिर हाउसिंग बोर्ड ने आयुष विंग बनाने के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया की है, लेकिन अब ड्राइंंग और डिजाइन में पेच फंस गई है। जहां पर आयुष विंग बनाया जाना है वहां हनुमान मंदिर होने की वजह से ड्राइंग और डिजाइन बदलने के लिए जिला आयुष अधिकारी डॉ. नरेन्द्र पटेल ने भोपाल आयुष संचनालय को पत्र लिखा है। उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय से कुछ ही दूरी पर खोवा मंडी के पास आयुष विंग के भवन निर्माण के लिए प्रशासन ने स्वीकृत की है। 2021-22 में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अर्न्तगत जिला अस्पताल में लगभग 35 लाख की लागत से आयुष विंग तैयार कर पंचकर्म की सुविधा देने का प्लान बनाया गया था। जिला अस्पताल प्रबंधन के पास आयुष विंग के निर्माण के लिए जगह न होने के चलते दूसरी जगह चिन्हित की गई।
5 हजार वर्गफुट में बनाना है विंग
जानकारों के अनुसार आयुष विंग के निर्माण में टेंडर शर्तों के अनुसार 5 हजार वर्गफुट क्षेत्र में होना है। खोवा मंडी के पास हनुमान मंदिर है, जिसे न हटाने की मांग बजरंग दल के सदस्यों द्वारा की गई है। दोबारा टेंडर हुए लगभग 4 माह का वक्त बीतने को और काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। जानकारों के अनुुसार अगर हनुमान मंदिर नहीं हटाया जाता तो आयुष विंग तय ड्राइडिंग व डिजाइन में नहीं बन सकता।
अभी मरीजों को नहीं मिल पा रही सुविधा
जिला अस्पताल में आयुष विंग हाल ही में संचालित किया गया है। आयुष विभाग की यहां खुद की बिल्डिंग नहीं है वहीं जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में पंचकर्म की सुविधा तो है लेकिन विषय विशेषज्ञ न होने व नियमित चिकित्सक न बैठने की वजह से पंचकर्म की सुविधा खटाई में है।
अभी मरीजों को नहीं मिल पा रही सुविधा
जिला अस्पताल में आयुष विंग हाल ही में संचालित किया गया है। आयुष विभाग की यहां खुद की बिल्डिंग नहीं है वहीं जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में पंचकर्म की सुविधा तो है लेकिन विषय विशेषज्ञ न होने व नियमित चिकित्सक न बैठने की वजह से पंचकर्म की सुविधा खटाई में है।
ये है प्लान
आयुर्वेद में पंचकर्म का विशेष महत्व है। इस चिकित्सा में लंबी व असाध्य रोगो का इलाज किया जाता है जिससे मरीजों को काफी राहत मिलती है। आयुष विंग में पंचकर्म से गठिया, लकवा, पेट से जुड़े रोग, साइनस, माइग्रेन, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, साइटिका, बीपी, डायबीटीज, लिवर संबंधी विकार, जोड़ों का दर्द, आंख और आंत की बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को से लाभ मिल सकेगा। बताया गया कि आयुष विंग नए सिरे से बनने से आयुष विंग में छह डॉक्टर पदस्थ किए जाएंगे। इनमें तीनों पैथियों के एक-एक विशेषज्ञ और एक-एक सहायक चिकित्सक होंगे। विंग में 15 कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे।
आयुष विंग के निर्माण के लिए तय डिजाइन के अनुसार भवन नहीं बन सकता है जहां पर जमीन चिन्हित की जा रही है वहां हनुमान मंदिर है। हनुमान मंदिर न हटाने बजरंग दल के सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई थी, वहीं ड्राइंग व डिजाइन बदलने भोपाल आयुष संचालनालय से अनुमति मांगी गई है।
मनोज द्विवेदी, ईई, हाउसिंग बोर्ड


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