क्या आप जानते हैं कि व्रत केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि एक 'बायोलॉजिकल रिपेयर' है? जानिए कैसे उपवास कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।
By: Ajay Tiwari
Jan 07, 20264:03 PM
लाइफ स्टाइल. स्टार समाचार वेब
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से अलग, विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही व्रत (Fasting) को शरीर के लिए एक 'रीसेट बटन' की तरह मानते हैं। आधुनिक शोधों ने सिद्ध किया है कि व्रत रखना हमारे मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
शरीर के लिए व्रत क्यों जरूरी हैं, जानते हैँ...
शरीर का शुद्धिकरण (Detoxification)
जब हम भोजन नहीं करते, तो हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इस समय का उपयोग शरीर अपनी आंतरिक सफाई के लिए करता है। शरीर में जमा विषैले तत्व (Toxins) बाहर निकलने लगते हैं, जिससे त्वचा में चमक आती है और अंगों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
ऑटोफैगी: 'सेल्फ क्लीनिंग' प्रक्रिया
2016 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार 'ऑटोफैगी' (Autophagy) की खोज के लिए दिया गया था। व्रत के दौरान, शरीर की कोशिकाएं अपनी ही पुरानी, क्षतिग्रस्त और बीमार कोशिकाओं को खाकर उन्हें नष्ट कर देती हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक है।
वजन नियंत्रण और इंसुलिन संवेदनशीलता
व्रत रखने से शरीर ऊर्जा के लिए जमा 'फैट' (Fat) का उपयोग करना शुरू कर देता है, जिससे वजन प्राकृतिक रूप से कम होता है। साथ ही, यह रक्त में शर्करा (Sugar) के स्तर को संतुलित करता है और टाइप-2 मधुमेह के खतरे को कम करता है।
मस्तिष्क के लिए वरदान
व्रत के दौरान शरीर में BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नामक प्रोटीन का स्तर बढ़ता है। यह याददाश्त सुधारने, एकाग्रता बढ़ाने और अल्जाइमर व पार्किंसंस जैसी दिमागी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
हृदय और कोलेस्ट्रॉल
नियमित अंतराल पर व्रत रखने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कम होता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है।
व्रत रखने पर रखी जाने वाली सावधानियां
सावधानी की बात:
पानी का सेवन करते रहना चाहिए जो व्रत में शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। व्रत का आहार करते रहना चाहिए। बहुत लंबे समय तक या बिना तैयारी के उपवास करना कमजोरी ला सकता है। यदि आपको डायबिटीज या कोई पुरानी बीमारी है, तो बिना डॉक्टरी सलाह के उपवास न करें। सप्ताह में एक बार या महीने में दो बार उपवास (जैसे एकादशी या इंटरमिटेंट फास्टिंग) करना आधुनिक जीवनशैली में शरीर की आयु बढ़ाने का सबसे सरल और मुफ्त तरीका है।