भोपाल के कोहेफिजा में शत्रु संपत्ति विवाद गहराया। रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 की जांच के बाद रहवासियों को नोटिस जारी। जानिए क्या है पूरा मामला और इसके वैधानिक पहलू।

भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान और उनकी दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जुड़ी संपत्तियों को लेकर वर्षों पुराना 'शत्रु संपत्ति' विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। न्यायालय सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़), भोपाल द्वारा 16 सितंबर 2026 से कोहेफिजा क्षेत्र के रहवासियों को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सामने आए एक नोटिस के अनुसार, ग्राम कोहेफिजा के खसरा क्रमांक 42/10 (रकबा 0.0320 हेक्टेयर) से जुड़े संबंधित व्यक्ति को 24 सितंबर को अपने पक्ष में दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से 'रियाज मंजिल' से जुड़ा हुआ है, जिसका ऐतिहासिक संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से माना जाता है। अमिताभ अग्निहोत्री की शिकायत पर की गई जांच के आधार पर रियाज मंजिल को भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय की 29 अप्रैल 2024 की फाइल के अनुसार शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है। इसके अलावा, संबंधित खसरे के कॉलम 12 में 'शत्रु संपत्ति जांच' की प्रविष्टि दर्ज करते हुए शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 (Enemy Property Act, 1968) की धारा 12 का हवाला दिया गया है। जून 2026 में भोपाल कलेक्टर के निर्देशों के बाद इस जांच का दायरा केवल रियाज मंजिल तक सीमित न रहकर मेपल हाउस, नानी की हवेली और नवाब परिवार से जुड़ी अन्य संपत्तियों तक फैलने के संकेत मिले हैं।
जांच के दायरे में केवल कोठी और मकान ही नहीं, बल्कि आफताब जहां बेगम के नाम से दर्ज रहीं सैकड़ों एकड़ जमीनें भी शामिल हैं। वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में बेहटा और बोरबन में बड़ी मात्रा में भूमि दर्ज होने का दावा किया गया है। आरोप है कि कालांतर में पावर ऑफ अटॉर्नी और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर हिबानामे के जरिए इन जमीनों की खरीद-फरोक्त की गई। इनमें बेहटा की 30.55 एकड़ जमीन की वर्ष 1994 की बिक्री को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जांच की मांग भी उठाई गई है।
इस पूरी कार्रवाई के पीछे केंद्र सरकार का एक बड़ा वैधानिक कदम है। केंद्र सरकार द्वारा 25 अप्रैल 2024 को जारी अधिसूचना के तहत देशभर के जिलाधिकारियों को पदेन उप-अभिरक्षक (Deputy Custodian), एसडीएम को पदेन सहायक अभिरक्षक (Assistant Custodian), और तहसीलदारों को पदेन निरीक्षक नियुक्त किया गया है। फरवरी 2026 में संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में भी इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई थी। यही कारण है कि भोपाल में एसडीएम स्तर पर शुरू की गई यह कार्रवाई किसी आम राजस्व जांच के बजाय शत्रु संपत्ति अधिनियम के सख्त कानूनी दायरे के तहत संचालित हो रही है।
कोहेफिजा, खानूगांव, बैरागढ़, बोरबन और बेहटा क्षेत्रों के हजारों नागरिकों के मन में अपनी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल नोटिस मिलने मात्र से क्षेत्र की सभी जमीनें शत्रु संपत्ति नहीं हो जातीं। प्रत्येक संपत्ति की वैधता उसके मूल स्वामित्व, पुराने राजस्व रिकॉर्ड, विक्रय-पत्रों की श्रृंखला और अभिरक्षक के वास्तविक आदेश पर निर्भर करेगी। यह आवश्यक है कि प्रशासन प्रभावित नागरिकों के सामने 29 अप्रैल 2024 के मूल आदेश और संपत्ति-सूची को पूरी पारदर्शिता के साथ रखे, ताकि लोग अफवाहों और अनिश्चितता से बच सकें।

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