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भोपाल: जेपी अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में भीषण आग, फायर सिस्टम फेल

भोपाल के जेपी अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में शॉर्ट सर्किट से आग लगी। गार्ड हरिदेव यादव की बहादुरी से टला हादसा, अस्पताल का फायर सेफ्टी और स्प्रिंकलर सिस्टम रहा फेल

By: Ajay Tiwari

Feb 18, 20263:47 PM

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भोपाल: जेपी अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में भीषण आग,  फायर सिस्टम फेल

भोपाल के जेपी अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में शॉर्ट सर्किट से आग लगी।

भोपाल। स्टार समाचार वेब

राजधानी के जय प्रकाश (जेपी) अस्पताल में बुधवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब ओपीडी ब्लॉक की पहली मंजिल पर स्थित एक स्टोर रूम में अचानक आग लग गई। घटना दोपहर करीब 12:15 बजे की है। धुएं का गुबार फैलते ही मरीजों और डॉक्टरों में भगदड़ मच गई। हालांकि, एक जांबाज गार्ड की सूझबूझ से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई।

 सिरिंज और सर्जिकल सामान जलकर खाक

आग ओपीडी ब्लॉक के उस कमरे में लगी जिसे वर्तमान में स्टोर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। यहाँ भारी मात्रा में प्लास्टिक सिरिंज, सैंपल कलेक्टिंग उपकरण और अन्य सर्जिकल सामग्री रखी हुई थी। प्लास्टिक के जलने से कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर काले धुएं से भर गया। एहतियात के तौर पर अस्पताल की बिजली सप्लाई तुरंत काट दी गई।

गार्ड ने जान जोखिम में डाल बुझाई आग

आग की सूचना मिलते ही गार्ड हरिदेव यादव मौके पर पहुंचे। कमरे का ताला लगा होने और चाबी न मिलने पर उन्होंने गेट तोड़कर अंदर प्रवेश किया। फायर ब्रिगेड के आने का इंतजार किए बिना उन्होंने अकेले ही 8 फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्रों) की मदद से आग पर काबू पाया। आग बुझाने के दौरान जहरीला धुआं अंदर जाने से हरिदेव यादव की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है।

 शो-पीस बने रहे करोड़ों के स्प्रिंकलर

घटना ने अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया है कि पिछले साल लगाए गए ऑटोमैटिक वॉटर स्प्रिंकलर आग लगने पर सक्रिय नहीं हुए। करोड़ों का फायर सेफ्टी सिस्टम अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी के बीच 'हैंडओवर' न होने के कारण बंद पड़ा था। प्राथमिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। अस्पताल की पुरानी वायरिंग और कमजोर प्लानिंग को इस हादसे के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। सूचना के बावजूद दमकल की गाड़ियां करीब 30 मिनट देरी से मौके पर पहुंचीं।

सिविल सर्जन और एजेंसी के बीच तीखी नोक-झोंक

छुट्टी से वापस लौटे सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन और फायर सेफ्टी एजेंसी के बीच घटना के बाद जमकर बहस हुई। एजेंसी का दावा है कि जब तक सिस्टम का औपचारिक हैंडओवर नहीं होता, तब तक उसका संचालन संभव नहीं है। फिलहाल, हादसे के बाद आनन-फानन में सिस्टम को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।


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