भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार की सैद्धांतिक अनुमति पर सवाल उठाए हैं और पुराने ड्राफ्ट का हवाला देते हुए 9 सितंबर को डेढ़ किलोमीटर लंबी 'रन फॉर मास्टर प्लान' दौड़ का ऐलान किया है।

सैद्धांतिक अनुमति पर सवाल: कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि केवल सैद्धांतिक अनुमति देने से मास्टर प्लान लागू नहीं होता, इसके लिए ड्राफ्ट प्रकाशित कर आपत्तियां बुलानी होंगी जिसमें 5 महीने तक का समय लग सकता है।
पुराने ड्राफ्ट पर जोर: मसूद ने सवाल उठाया कि जब पहले से ही एक ड्राफ्ट तैयार मौजूद है और उसे रद्द करने का कोई आदेश नहीं है, तो नए ड्राफ्ट की क्या आवश्यकता है।
9 सितंबर को विरोध प्रदर्शन: मास्टर प्लान के समर्थन में 9 सितंबर को शाम 7:30 बजे 11 नंबर स्टॉप से हबीबगंज थाने के पास गांधी प्रतिमा तक डेढ़ किलोमीटर की 'रन फॉर मास्टर प्लान' दौड़ निकाली जाएगी।
सीलिंग और मास्टर प्लान अलग मुद्दे: मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार मास्टर प्लान और सीलिंग को मिलाकर जनता को भ्रमित कर रही है, क्योंकि मास्टर प्लान से सीलिंग की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार द्वारा मास्टर प्लान को दी गई सैद्धांतिक अनुमति पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सैद्धांतिक अनुमति देने भर से मास्टर प्लान जमीन पर लागू नहीं हो जाता। इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें नया या संशोधित ड्राफ्ट तैयार कर उसका प्रकाशन करना और जनता से दावे-आपत्तियां आमंत्रित करना शामिल है। मसूद के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग पांच महीने का वक्त लग सकता है, और सरकार इस मामले को केवल टालने का प्रयास कर रही है।
विधायक आरिफ मसूद ने पूर्व कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उनके समय में मास्टर प्लान का एक ड्राफ्ट पहले ही तैयार किया जा चुका है। आज तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है जिसमें उस पुराने ड्राफ्ट को रद्द किए जाने की बात कही गई हो। ऐसे में उन्होंने सरकार से जवाब मांगा है कि पुराने ड्राफ्ट को आगे बढ़ाने के बजाय नए सिरे से ड्राफ्ट तैयार करने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। यदि पुराने ड्राफ्ट में कुछ बदलावों या संशोधनों की आवश्यकता है, तो उसमें आवश्यक संशोधन करके उसे तुरंत प्रकाशित किया जाना चाहिए।
सीलिंग की कार्रवाई को लेकर सरकार पर बरसते हुए मसूद ने कहा कि मास्टर प्लान और सीलिंग कार्रवाई दो पूरी तरह से अलग मसले हैं, लेकिन सरकार दोनों को आपस में मिलाकर आम जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है। उनके मुताबिक, मास्टर प्लान आने से आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों का दायरा तो स्पष्ट हो जाएगा, जिससे कई स्थानीय समस्याओं का हल निकलेगा, लेकिन इससे सीधे तौर पर सीलिंग की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होने वाली है।
जनता को परेशान करना बंद करे सरकार
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का खामियाजा केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि उन आम नागरिकों को भी भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने अपने रहने के लिए आवासीय मकान या बंगले खरीदे थे। जिन व्यापारियों से सरकार सालों साल टैक्स वसूलती रही, आज अचानक उन्हीं पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और सरकारी गलतियों का भारी बोझ जनता पर नहीं डाला जाना चाहिए तथा सुप्रीम कोर्ट के रुख को ध्यान में रखते हुए जनता को लंबे समय तक परेशान करना बंद किया जाना चाहिए।
सरकार पर दबाव बनाने और मास्टर प्लान की मांग को जन आंदोलन का रूप देने के लिए आरिफ मसूद ने 9 सितंबर को एक विशेष कार्यक्रम की घोषणा की है। इस दिन शाम 7:30 बजे 11 नंबर स्टॉप से लेकर हबीबगंज थाने के सामने स्थित गांधी प्रतिमा तक करीब डेढ़ किलोमीटर की 'रन फॉर मास्टर प्लान' दौड़ का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने शहर के नागरिकों से अपील की है कि वे हाथों में तिरंगा लेकर इस दौड़ में शामिल हों। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस गैर-राजनीतिक आयोजन में किसी भी राजनीतिक दल का बैनर इस्तेमाल नहीं होगा और न ही किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ हूटिंग या नारेबाज़ी की जाएगी। इस अभियान से व्यापारियों, डॉक्टरों, सामाजिक संगठनों और एनजीओ को जोड़ने के लिए अगले चार दिनों तक संपर्क अभियान चलाया जाएगा।

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