भोपाल के अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा और गौतम नगर समेत कई आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी के विरोध में रहवासियों ने रविवार को रैली निकाली।

भोपाल के पॉश और प्रमुख आवासीय इलाकों—अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां, गौतम नगर और शाहपुरा समेत कई क्षेत्रों में आवासीय परिसरों में धड़ल्ले से चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ रहवासी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। रविवार को इन तमाम इलाकों के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई महज एक दिखावा और कागजी खानापूर्ति है, क्योंकि सीलिंग के बावजूद कई इलाकों में दुकानें धड़ल्ले से खुली रहीं। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने रैली निकालकर चेतावनी दी है कि वे इन तमाम सबूतों को अब सीधे कोर्ट में पेश करेंगे।
बीते शनिवार को भोपाल नगर निगम ने बड़ी सख्ती दिखाते हुए शहर में अवैध रूप से संचालित हो रहे 19 प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई की थी। हालांकि, नगर निगम की इस कार्रवाई से पहले ही 65 प्रतिष्ठानों के शटर गिर गए थे और वे बंद हो गए थे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कार्रवाई पूरी होने के ठीक शाम को ही कई सील दुकानें और प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए। इस लीपापोती से खफा अरेरा कॉलोनी और आसपास के रहवासियों ने रविवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। गौतम नगर इलाके में 'संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति' के बैनर तले रहवासियों ने एक बड़ा पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में रचना नगर, शांति निकेतन, शाहपुरा, गुलमोहर और अरेरा कॉलोनी के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
पैदल मार्च के दौरान गौतम नगर रहवासी समिति के अध्यक्ष मोहन खरपते और सोमकांत उमलकर ने खुलकर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि उनके आवासीय क्षेत्रों में भारी संख्या में अवैध रूप से होटल, हॉस्टल और 'चाय सुट्टा बार' संचालित हो रहे हैं। इन जगहों पर देर रात तक बड़ी संख्या में संदिग्ध व्यक्तियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे इलाके की शांति और सुरक्षा दांव पर लग गई है। क्षेत्रीय निवासी आदित्य ने अपनी गंभीर समस्या रखते हुए बताया कि उनके घर के ठीक सामने दिनभर लोग खड़े होकर सिगरेट पीते हैं, जिसके धुएं और प्रदूषण के कारण उनके परिवार के सदस्यों के फेफड़े तक संक्रमित होने लगे हैं।
विरोध प्रदर्शन के दौरान रहवासियों ने तीखे तेवर दिखाते हुए आरोप लगाया कि शहर के कई रसूखदार नेता इन अवैध व्यावसायिक भवनों के संचालकों को सीधा संरक्षण दे रहे हैं। रहवासियों ने खुली चेतावनी देते हुए कहा कि भोपाल के 95 प्रतिशत मतदाता इस गंभीर समस्या से त्रस्त हैं। आज जो राजनीतिक दल या नेता इस मुद्दे पर रहवासियों के खिलाफ खड़े हैं, आने वाले चुनावों में वे सभी उनका कड़ा विरोध करेंगे। इस आंदोलन को धार देने के लिए भोपाल के पूर्व कमिश्नर कवींद्र कियावत भी खुद पैदल मार्च में शामिल हुए और उन्होंने इस बढ़ती अराजकता के खिलाफ सभी नागरिकों को एकजुट होकर लड़ने की जोरदार अपील की। वहीं, शाहपुरा समिति की अध्यक्ष शुभ्रा गोयल ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने शाहपुरा क्षेत्र के तमाम अवैध निर्माणों पर आंखें मूंद रखी हैं, जिसे रहवासी अब खुद उजागर करेंगे।
प्रयास संस्था की अध्यक्ष अपर्णा वाशिष्ठ ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद नगर निगम ने जिन अवैध दुकानों को सील करने के नोटिस दिए थे, उनके विरुद्ध जमीन पर कोई ठोस या अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, कई दुकानों के बाहर केवल एक ही प्रारूप के पोस्टर चिपका दिए गए, जिन पर लिखा था कि 'भोपाल नगर पालिका निगम के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।' रहवासियों का कहना है कि यह सिर्फ खानापूर्ति है और वे नगर निगम की इस कागजी कार्रवाई के तमाम सबूत अदालत में पेश करेंगे।

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