सतना के भुमरा शिव मंदिर से 1920 में प्राप्त भगवान गणेश और उनकी शक्ति की यह अनूठी गुप्तकालीन प्रतिमा आज अमेरिका के बॉस्टन संग्रहालय में सुरक्षित है। चार भुजाओं वाले गणेशजी इस प्रतिमा में शक्तिस्वरूपा के साथ विराजमान हैं। भारतीय कला, शिल्प और इतिहास के लिए यह प्रतिमा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब

सतना के भुमरा शिव मंदिर में साल 1920 में प्राप्त हुई यह प्रतिमा बेहद अनूठी है। भारतीय कला इतिहास में गुप्तकाल (चौथी-छठी शताब्दी ईस्वी) को एक स्वर्णिम युग माना जाता है। इसी काल में भगवान गणेश की स्वतंत्र मूर्तियां बड़ी संख्या में सामने आती हैं। भुमरा जैसे स्थलों पर इनके उत्कृष्ट उदाहरण देखे जा सकते हैं। अमेरिका के बॉस्टन में स्थित फाइन आर्ट्स म्यूजियम में सुरक्षित एक दुर्लभ मूर्ति इसी परंपरा की झलक देती है। इसमें गणेशजी चार भुजाओं से युक्त दिखाई देते हैं। वे अपने बाएं जंघा पर विराजित शक्तिस्वरूपा को आलिंगन किए हुए हैं। अन्य हाथों में वे परशु (कुल्हाड़ी), टूटा हुआ दंत और एक कमल कली धारण किए हैं। उनका सूंड़ अपनी शक्ति द्वारा पकड़े गए मोदकपात्र की ओर बढ़ा हुआ है।
विशेष बात यह है कि प्रतिमा के निचले हिस्से में गणेशजी के वाहन मूषक का चित्र लुप्त हो चुका है, सम्भव है कि यह पहले पादपीठ पर अंकित रहा हो। उनके कटीप्रदेश पर सर्प लिपटा हुआ है, जो शिव से उनके गहरे संबंध का प्रतीक माना जाता है। मूर्ति के ऊपरी दाएँ कोने में ब्रह्मा की लघु आकृति भी अंकित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भगवान गणेश की इस प्रकार की स्वतंत्र प्रतिमाएं गुप्तकाल में पहली बार सामने आई थी। यह प्रतिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि भारतीय शिल्पकला और सांस्कृतिक इतिहास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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