रीवा के संजय गांधी अस्पताल के मर्चुरी मार्ग पर खुले में बायोमेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। जहां मरीजों और मृतकों के परिजन गुजरते हैं, वहां गंदगी और बदबू से हाल बेहाल है। स्वच्छता के नाम पर ठेका व्यवस्था की पोल खोलती यह तस्वीर प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है।

अस्पताल के पीछे खुले में फेंका जा रहा बायोमेडिकल वेस्ट
रीवा, स्टार समाचार वेब
आठ सौ बिस्तर वाले संजय गांधी अस्पताल की उम्र अब 24 साल हो चुकी है। यानी इस अस्पताल में अनुभव का पर्याप्त भण्डार है। मरीजों एवं इलाज की हम बात करें तो अच्छे व अनुभवी चिकित्सक हैं तो साथ ही उपकरण भी बेहतरीन हैं। यह बात अलग है कि उपकरणों का उपयोग और उपभोग कब व कैसे किया जाता है इसकी जानकारी मरीजों व उनके परिजनों तक कम ही पहुंचती है।
अस्पताल है तो मरीज व गंदगी का होना स्वाभाविक है पर गंदगी को दूर करने के लिए या उन्हें हटाने के लिए कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी है। संजय गांधी अस्पताल में वर्तमान समय पर स्वच्छता के लिए ठेका पद्धति लागू है। अब यह स्वच्छता का काम ठेकेदार के कर्मचारी किस तरह करते हैं इसे ऊपर मौजूद तस्वीर को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह तस्वीर ‘स्टार समाचार’ के छायाकार द्वारा 7 जुलाई को खींचा गया है। तस्वीर का स्थान संजय गांधी अस्पताल के उस जगह का है जिसे मर्चुरी के नाम से जाना जाता है। मर्चुरी यानी जहां मृत्यु के कारण पर संशय होने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए रखा जाता है। जाहिर सी बात है कि पोस्टमार्टम के लिए रखे जाने वाले शव की वजह से थोड़ा-बहुत गंदगी का होना स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन आसपास यदि गंदगी बढ़ती जाए तो परेशानी का भी बढ़ना स्वाभाविक है। हम आपको बता दें कि मर्चुरी में शव परीक्षण के दौरान वही लोग इस स्थान में पहुंचते हैं जिनका सीधा संबंध उस शव से होता है। लिहाजा उन्हें भी घंटों नाक बंद करके बैठना पड़ता है।
स्टाफ भी करता है मार्ग का प्रयोग
यह तस्वीर जिस स्थान की है वहां मृतक के परिजनों की मौजूदगी कुछ मायने में मजबूरन होती है लेकिन यहां से वार्डबॉय, स्टाफ नर्स सहित विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी दिन में एक नहीं बल्कि कई बार गुजरते हैं। सीधी सी बात है या तो ऐसे लोगों को इस गंदगी की आदत पड़ गई है या फिर वे चाहकर भी अपने से बड़े अधिकारियों तक शिकायत नहीं कर पाते हैं। दु:खद पहलू यह है कि समूचे शहर में वर्तमान समय पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है किंतु अब यहां स्वच्छता कब होगी यह भविष्य के गर्त में है।

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