केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्वदेशी एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव तकनीक का अनावरण किया है, जो एलपीजी से सस्ती है। साथ ही युवाओं में विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का ऐलान किया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

स्वदेशी 'एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव टेक्नोलॉजी'
रसाई में ईंधन का नया विकल्प मिला, अनावरण
कमर्शियल LPG से भी सस्ता होगा खाना बनाना
नागपुर। स्टार समाचार वेब
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पूरी तरह स्वदेशी 'एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव टेक्नोलॉजी' (Ethanol-Based Cooking Stove Technology) का अनावरण किया है।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस तकनीक को पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि इस अनूठे स्वदेशी स्टोव की मदद से पारंपरिक और कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की तुलना में बेहद कम खर्च पर खाना पकाया जा सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने देश के युवाओं और बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए ₹40 करोड़ की एक महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा भी की।
गडकरी ने इस तकनीक की कार्यप्रणाली को बेहद सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि इस नए स्टोव में खाना पकाने के लिए उपयुक्त और सुरक्षित लौ (Flame) उत्पन्न करने के लिए एथेनॉल और पानी के एक विशेष मिश्रण का उपयोग किया जाता है। मंत्री ने कहा, "इस तकनीक के तहत पानी में सिर्फ 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर स्टोव से बेहतरीन लौ पैदा की जा सकती है। यह ईंधन हमारी आम खाना पकाने वाली गैस से काफी सस्ता है और सबसे बड़ी बात यह है कि इसे पूरी तरह से हमारे अपने देश में ही विकसित किया गया है।"
यह नया नवाचार (Innovation) जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती विकल्पों को बढ़ावा देने के नितिन गडकरी के दीर्घकालिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। पिछले कई वर्षों से वे परिवहन, वाहन और ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एथेनॉल के उपयोग की वकालत करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह के विकल्पों से न केवल विदेशों से आयात होने वाले महंगे कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम होगी, बल्कि इससे घरेलू कृषि क्षेत्र, भारतीय किसानों और देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों (Clean Energy Goals) को भी जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरतों का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके कारण ऊर्जा सुरक्षा देश की शीर्ष नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को मिशन मोड में बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप 2014 में जो मिश्रण स्तर महज 1.53 प्रतिशत था, वह अब 2025-26 तक बढ़कर 20 प्रतिशत के स्तर को छू रहा है। नितिन गडकरी को इस ब्लेंडिंग प्रोग्राम का सबसे बड़ा मार्गदर्शक माना जाता है और अब यह नई स्टोव तकनीक इसी एथेनॉल क्रांति को सीधे भारतीय रसोईघरों और देश के उन लाखों परिवारों तक ले जाएगी जो आज भी पूरी तरह एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं।
यदि इस एथेनॉल कुकिंग स्टोव तकनीक को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा जाता है, तो यह पारंपरिक गैस सिलेंडरों का एक बेहतरीन और सस्ता विकल्प साबित होगा। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार का ध्यान भविष्य की पीढ़ी को तैयार करने पर भी है। इस संबंध में घोषणा करते हुए गडकरी ने कहा, "जैसे-जैसे आधुनिक तकनीक विकसित हो रही है, हमारा प्रयास बच्चों को इसके साथ जोड़ने का है। हम युवाओं और बच्चों के भीतर विज्ञान और अनुसंधान (Science and Research) के प्रति प्रेम जगाने के लिए ₹40 करोड़ की एक बड़ी परियोजना पर भी तेजी से काम कर रहे हैं।"

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