अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान से शेयर बाजार में भारी उछाल। सेंसेक्स 2700 और निफ्टी 800 अंक चढ़ा। जानें किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी और क्या रहे मुख्य कारण।

मुंबई। बिजनेस डेस्क. स्टार समाचार वेब
मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध की आहट के बीच जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्तों के युद्धविराम (US-Iran Ceasefire) की खबर आई, भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को ऐतिहासिक स्वागत किया। वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद स्तर 74,616.58 के मुकाबले सीधे 77,290 पर खुला और देखते ही देखते 2,700 अंकों से ज्यादा की बढ़त के साथ 77,392 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की इस तूफानी रफ्तार ने निवेशकों को गदगद कर दिया है।
निफ्टी (NSE Nifty) में भी 'सुनामी'
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (NSE Nifty) में भी ऐसी ही 'सुनामी' तेजी देखी गई। निफ्टी 50 इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,123.65 की तुलना में जबरदस्त उछाल के साथ 23,855 पर ओपन हुआ और पलक झपकते ही 800 अंकों की तगड़ी छलांग लगाते हुए 23,938 के नए ऊंचे लेवल पर जा पहुंचा। युद्ध पर अस्थायी रोक लगते ही दलाल स्ट्रीट पर हर तरफ हरियाली छा गई और बाजार के सभी सेक्टर्स में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की।
बाजार की इस 'रैली' में बड़े शेयरों ने भी बंपर प्रदर्शन किया। BSE लार्जकैप के 30 में से 29 शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे, जिसमें इंडिगो (10%), एलएंडटी (8%), बजाज फाइनेंस और अडानी पोर्ट्स (7-7%) की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स रहे। बैंकिंग सेक्टर में भी जोरदार उछाल रहा, जहाँ एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों ने 4 फीसदी तक की छलांग लगाई, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी 3 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे।
शेयर बाजार में आई इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण माने जा रहे हैं। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर बनी सहमति, जिसने वैश्विक कूटनीतिक तनाव को कम कर निवेशकों के सेंटीमेंट में सुधार किया। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट (Crude Oil Price Crash)। तेल संकट गहराने के डर के बीच कीमतों का गिरना भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए बूस्टर डोज साबित हुआ, जिससे बाजार में यह जोरदार रिकवरी देखने को मिली।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सेंसेक्स और निफ्टी टूटे, फार्मा शेयरों का बुरा हाल।
भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई मापने का तरीका बदलने जा रहा है। सरकार पांच वर्षों में WPI को हटाकर उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) लागू करेगी। जानिए इसके मुख्य घटक और व्यापार पर असर।
घरेलू शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत हल्के दबाव के साथ हुई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी पर भी देखने को मिला। हालांकि, पीएसयू बैंक शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया।
सावन और रक्षाबंधन के त्योहारों से ठीक पहले आम आदमी के लिए मिठास महंगी हो गई है। इंदौर के फुटकर बाजार में इतिहास में पहली बार शक्कर के दाम 50 रुपए प्रति किलो के स्तर को पार कर गए हैं। देश में महंगाई दर मापने वाले थोक मूल्य सूचकांक में शक्कर की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से अधिक होती है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने रिलायंस जियो और 4,500 कंपनियों पर लगे प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। साक्ष्यों के अभाव में आयोग ने इसे एक बड़ा राहत भरा फैसला माना है।
एशियाई बाजारों में हाहाकार और कच्चे तेल के 85 डॉलर के पार जाने के बावजूद आज भारतीय शेयर बाजार हरे निशान पर खुला। एशियाई बाजार के शुरुआती कारोबार में चिपमेकर कंपनियों के शेयर लगातार बेचे जाने से दबाव में रहे।
भारतीय शेयर बाजार आज भी हरे निशान पर खुला और वह भी तब जब एशियाई बाजारों में आज चौतरफा भारी बिकवाली का माहौल है। कच्चे तेल की भी कीमतें और बढ़ी हैं। एशियन मार्केट पूरी तरह से क्रैश हो गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार ने अपनी अद्भुत मजबूती का प्रदर्शन किया है।
आज अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित नरमी के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। बैंक और वित्तीय शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया। अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों ने सकारात्मक रुझान दिखाया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल ईंधन का पुरजोर समर्थन करते हुए इस पर लगे निजी हितों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में 100 फीसदी पेट्रोल का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसके लिए उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी होगी।