मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अशोकनगर के करीला धाम में लव-कुश की जन्मस्थली के विकास की घोषणा की। 115 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन।
By: Star News
Mar 09, 20262:25 PM
अशोकनगर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की फिजाओं में रविवार को एक अलग ही गूँज थी। अवसर था रंगपंचमी मेला महोत्सव का और स्थान था पावन करीला धाम—वह पवित्र भूमि जहाँ माता सीता ने अपने निर्वासन काल के दौरान धैर्य और साहस की प्रतिमूर्ति बनकर लव-कुश को जन्म दिया था।
जैसे ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करीला धाम की देहरी पर पहुँचे, वातावरण 'जय जानकी' के उद्घोष से भर उठा। मुख्यमंत्री ने केवल मंदिर में शीश ही नहीं नवाया, बल्कि खुद ढोल बजाकर और शंखनाद कर इस उत्सव की दिव्यता को बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं के साथ फूलों की होली खेलते हुए मुख्यमंत्री पूरी तरह भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
भक्तों को संबोधित करते हुए डॉ. यादव ने माता सीता के जीवन को आधुनिक नारी शक्ति के लिए प्रेरणापुंज बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
"करीला धाम श्रद्धा और भक्ति का वह अनूठा संगम है, जहाँ माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ विराजमान हैं। यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो लव-कुश की बाल लीलाओं का साक्षी है।"
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति सदैव सर्वोपरि रही है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा में लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने केवल श्रद्धा के फूल ही नहीं अर्पित किए, बल्कि जिले के विकास के लिए 115 करोड़ रुपये की लागत वाले 50 विकास कार्यों का उपहार भी दिया।
कनेक्टिविटी: ग्राम दीपनाखेड़ा से करीला धाम तक 10 किलोमीटर लंबी नई सड़क की स्वीकृति।
तीर्थ विकास: कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि करीला धाम के संपूर्ण विकास के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना (Master Plan) बनाई जाए।
राम वन गमन पथ: उन्होंने याद दिलाया कि चित्रकूट में बिताए प्रभु राम के 11 वर्षों की स्मृतियों को सहेजने के लिए प्रदेश सरकार 'राम वन गमन पथ' को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है।
मंच से मुख्यमंत्री ने सात ऐसी महिलाओं को सम्मानित किया जिन्होंने शिक्षा, खेल, पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में जिले का मान बढ़ाया है। डॉ. अमिता सेठी और पूनम रघुवंशी जैसी विभूतियों को सम्मानित कर उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में 'शक्ति' का पर्याय हैं।
करीला धाम की इस यात्रा ने न केवल धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दी, बल्कि स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर मुख्यमंत्री ने आर्थिक सशक्तिकरण का भरोसा भी दिलाया। रंगपंचमी के इस उल्लास के बीच करीला धाम अब एक भव्य और विकसित तीर्थ स्थल बनने की ओर अग्रसर है।