रीवा के संजय गांधी अस्पताल के ईएनटी विभाग में पदस्थ डॉ. अशरफ को हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए राहत प्रदान की। कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें विभाग में वापस ज्वाइन कराया गया। छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों और एबीवीपी व नर्सिंग एसोसिएशन के विरोध के बावजूद हाईकोर्ट ने अगले सुनवाई तक स्थगन आदेश जारी किया है।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबंध संजय गांधी अस्पताल के ईएनटी विभाग में पदस्थ डॉ अशरफ को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक के लिए उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीन ने ईएनटी के विभागाध्यक्ष को ज्वाइन कराने का आदेश दे दिया है।
ज्ञात हो कि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध नर्सिग कॉलेज की करीब 80 छात्राओं ने ईएनटी विभाग में पदस्थ डॉ अशरफ के खिलाफ दुर्व्यहार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। छात्राओं ने खुद को डॉ अशरफ से असुरक्षित बताया था। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद कॉलेज में जमकर एबीवीपी ने हंगामा किया था। नर्सिंग एसोसिएशन ने भी विरोध जताया था। निलंबन की मांग की थी। हंगामा के बाद आनन फानन में प्रभारी डीन ने डॉ अशरफ को निलंबित कर दिया था। इसी निलंबन आदेश का डॉ अशरफ को फायदा मिला। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट में डॉ अशरफ के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जिस अधिकारी ने निलंबन आदेश जारी किया है। वह डीन के पद के विरुद्ध कार्य कर रहे थे। निलंबन आदेश को ही चैलेंज किया गया। इस याचिका को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई तक के लिए 13 जुलाई 2015 को जारी किए गए आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 26 सितंबर को रखी गई थी। इसमें भी स्थगन आदेश को यथावत रखा है। डॉ अशरफ ने पीएस चिकित्सा शिक्षा एवं लोक स्वास्थ्य विभाग, डीएमई, सीएमई, प्रभारी डीन और डीन श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा को पार्टी बनाया है। राज्य के अधिवक्ता ने कोर्ट से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने अगले महीने में सुनवाई की तिथि तय कर दी है।
विभागाध्यक्ष ने बनाई दो टीमें
डॉ अशरफ के काम पर वापस लौटने के बाद विभागाध्यक्ष ने आदेश जारी किया है। इसमें अब दो यूनिटें बना दी गई है। एक यूनिट में डॉ सुरेन्द्र सिंह मोपाची के साथ सह प्राध्यापक डॉ पल्लवी इंदूरकर और सहायक प्राध्यापक डॉ नीरज कुमार दुबे रहेंगे। वहीं दूसरी टीम में डॉ अशरफ के साथ ही नामित सह प्राध्यापक डॉ यास्मीन सिद्दीकी रहेंगी। विभाग में दोबारा उपस्थिति दर्ज कराने के लिए डीन ने विभागाध्यक्ष को कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए आदेश जारी किया था।
कमिश्नर की जांच अब तक नहीं हुई पूरी
नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने कमिश्नर से मुलाकात कर आंतरिक परिवाद समिति की जांच पर सवाल खड़े किए थे। कमिश्नर से राजस्व की टीम गठित कर जांच कराने की मांग की थी। कमिश्नर ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। दो महीने का समय बीत गया लेकिन टीम ने अब तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। कुल मिलाकर डॉ अशरफ को फायदा पहुंचाने के लिए पूरा सिस्टम ही लगा हुआ था। डॉ अशरफ को निलंबन करने में ही गड़बड़ी की गई थी। कुल मिलाकर पहले से ही प्रबंधन ने उन्हें राहत पहुंचाने की प्लानिंग कर ली थी। जिसके तहत ही प्रभारी डीन डॉ प्रियंक शर्मा ने निंलबन आदेश जारी कर दिया था। उसके बाद कमिश्नर की जांच रिपोर्ट भी लटकी रह गई।


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