रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग में आंतरिक तनाव गहराता दिख रहा है। चार डॉक्टरों के इस्तीफा देने के बाद अब सह प्राध्यापक डॉ. शीतल पटेल का त्याग पत्र सामने आया है। पत्र में उन्होंने 36 घंटे तक लगातार काम, कोविड ड्यूटी के अनुभव और मरीजों से मिले स्नेह का उल्लेख किया है। इसके बावजूद वर्तमान माहौल में काम कर पाना असंभव बताते हुए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय जताया है, जिससे विभागीय खींचतान एक बार फिर उजागर हो गई है।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग में पदस्थ सह प्राध्यापक डॉ शीतल पटेल का त्याग पत्र स्टार समाचार को मिला है। इस पत्र ने विभाग में चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है। डॉ शीतल पटेल ने अस्पताल को 36 घंटे लगातार देने का जिक्र किया है। साथ ही अस्पताल से जुड़कर उन्हें आत्मसंतोष मिला। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब वह अस्पताल को शत प्रतिशत दे रहीं थी तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने वर्तमान हालात में काम करने से ही हाथ खड़े कर दिए हैं। यानी विभाग में कुछ तो गड़बड़ चल रहा।
आपको बता दें कि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी चिकित्सालय के गायनी विभाग में डॉक्टरों के इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है। अब तक चार डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इसमें चौथी चिकित्सक डॉ शीतल पटेल हैं। उन्होंने तीन पन्नों का इस्तीफा डीन को सौंपा। डीन ने फिलहाल सीसीएल में होने पर उनका इस्तीफा स्वीकार नही किया है लेकिन डॉ शीतल पटेल ने त्याग पत्र में अपने अब तक के कार्यों और उपलब्धियों का जिक्र किया है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि वह काम तो करना चाहती है लेकिन वर्तमान हालात में नहीं रहना चाहती। उनके पत्र ने विभाग में चल रही खींचतान को उजागर किया है।
ओटी में 12 घंटे खड़े-खड़े निकले
त्याग पत्र में डॉ शीतल पटेल ने कहा है कि कई बार वह सुबह 9 बे से अगले दिन दोपहर 4 बजे तक लगातार कर करती रहीं। 36 घंटे से भी ज्यादा काम किया। बिना खाए पिए काम किया। दिन में 3 घंटे राउंड कीं। ओटी में 10 से 12 घंटे सिर्फ खड़े खड़े निकाले। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान उन्होंने 24 घंटे सातों दिन ड्यूटी पूरी निष्ठा से कीं। कोवडि पॉजिटिव गर्भवती महिाओं के सीजेरियन आपरेशन तक की थी।
आनंदमयी अंतर्भाव के साथ अस्पताल ज्वाइन किया था
डॉ शीतल पटेल ने अपने त्याग पत्र में जिक्र किया है कि वर्ष 2018 में अपने परिवार और बच्चों के सहयोग से योग्यता के बल पर 8 मई ओबीजी पद पर आनंदमयी अंतर्भाव के साथ ज्वाइन किया। पूरा जीवन एक नए ऊर्जा से भर गया था। मातृत्व आनंद से भी ऊपर आनंद था। जरूरतमंद और अत्यंत कष्ट में आने वाले मरीजों की सेवा कर आनंद मिल रहा था। वर्ष 2018 से 2025 तक लगातार पूरी निष्ठा से जिम्मेदारी निभाई। वार्डों का राउंड लिया। यूजी, पीजी की कक्षाएं ली। प्रशासनिक अधिकारियों ने जो जिम्मेदारी दी, उसे निभाया।
मरीज उन्हें ढूढ़कर आभार और गिफ्ट देते थे
डॉ शीतल पटेल ने लिखा है कि उनका प्रयास मरीजों को स्वस्थ्य कर घर भेजना रहा है। उसमें वह सफल भी रहीं। इसी का नतीजा है कि कई बार मरीज प्रशंसा पत्र देकर जाते थे। उनकी अनुपस्थिति में अधीक्षक डॉ राहुल मिश्रा को देकर गए। एक मरीज उन्हें अस्पताल से सकुशल लौटने के बाद लौटा और सत्तू शक्कर देकर गया। मरीजों का प्यार उन्हें आत्मविभोर कर देता था और ऊर्जा से भर देता था।
कुछ तो गड़बड़ है इसलिए डॉ. छोड़ना चाहती हैं नौकरी
डॉ शीतल पटेल ने त्याग पत्र को पढ़ने के बाद कोई भी यह समझ जाएगा कि विभाग में माहौल ठीक नहीं चल रहा। इसके कारण ही उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा। वर्ना काम करने वाली चिकित्सक नौकरी क्यों छोड़ने के लिए मजबूर होंगे। जिन्हें पढ़ाई से लेकर काम के दौरान तक शिक्षक और मरीजों से इतना प्यार मिला हो, वह मन में पत्थर रखकर ही इतना बढ़ा फैसला ले सकता है। हालांकि उनका होने के कारण स्वीकार नहीं हुआ है।


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