रीवा के संजय गांधी अस्पताल में डिप्टी सीएम के लोकार्पण कार्यक्रम से पहले बड़ा हादसा टल गया। एसी डक्ट सिस्टम के पैनल में अचानक आग भड़क गई, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए समय रहते आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट और पुराने तारों के कारण यह घटना हुई।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
संजय गांधी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में शुक्रवार की सुबह बड़ा हादसा टल गया। तृतीय तल में जिस जगह पर डिप्टी सीएम को पहुंचना था। वहीं पर विद्युत पैनल में आग भड़क गई। बिजली के तार पटाखों की तरह फूटते हुए जलने लगे। गनीमत तो यह रही मौके पर ही कर्मचारी मौजूद थे। जिन्होंने वक्त रहते आग पर काबू पा लिया, वर्ना बड़ा हादसा तय था। आपको बता दें कि संजय गांधी अस्पताल के मेडिसिन विभाग के तृतीय तल में 20 लाख की लागत से लगे एसी डक्ट सिस्टम का शुभारंभ होना था। सुबह 10.30 बजे का समय निर्धारित किया जाना था। डिप्टी सीएम को कार्यक्रम में पहुंचना था। डिप्टी सीएम के पहुंचने के पहले तैयारियां चल रही थी। इसी दौरान अचानक पैनल में आग भड़क गई। पैनल में भड़की आग ने धीरे धीरे विकराल रूप लेना शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने हालांकि इसे सम्हालने की कोशिश की लेकिन शार्ट सर्किट से आग आगे बढ़ गई। लाइन चालू थी। ऐसे में लाइनों में करंट के कारण तार फटाखों की आवाज के साथ जलने लगी। हालांकि मौके पर ही अग्निशमन यंत्र लेकर कर्मचारी पहुंच गए। तुरंत आग पर काबू पाया गया। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। इससे बड़ा हादसा टल गया। आग के कारण मौके पर भगदड़ जैसे हालात बन गए हैं। कर्मचारी दहशत में आ गए थे।
गनीमत रही कि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम लेट हो गया
शुभारंभ का समय सुबह 10.30 बजे रखा गया था। गनीमत रही कि तय समय पर डिप्टी सीएम अस्पताल नहीं पहुंचे। टीआरएस में आयोजित कार्यक्रम में थे। यदि समय पर ही डिप्टी सीएम पहुंच जाते तो मौके पर भगदड़ मचनी भी तय थी। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम के साथ भीड़ भी पहुंचती जिससे अप्रिय घटना होने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता था।
लोड बढ़ने से हुआ शार्ट सर्किट
सूत्रों की मानें तो एसी डक्ट में चार एसी लगाए गए हैं। प्रत्येक एसी की क्षमता करीब 4 टन की है। ऐसे में 4 एसी की क्षमता बढ़ कर 16 टन पहुंच जाती है। इसे चलाने के लिए पर्याप्त क्षमता की केबिल नहीं लगाई गई। पतली और पुरानी केबिल से ही इसे चलाने की कोशिश की गई। इसी की वजह से लोड बढ़ने से शार्ट सर्किट हो गया। इसके अलावा एमसीबी स्विच भी नहीं लगाया गया था। जिससे बिजली के करंट को रोका जा सके।
काफी पुराने हो चुके हैं तार और केबिल
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में भी कुछ दिन पहले शार्ट सर्किट हो गया था। पटाखें जैसी वहां भी आवाज हुई थी। डीन डर कर चेम्बर छोड़कर भाग खड़े हुए थे। ठीक इसी तरह से अस्पताल में भी तार जले। वर्तमान समय में बिजली का लोड बढ़ गया है लेकिन केबिल और तार पुराने और कम क्षमता के हंै। इनके बदले नहीं जाने के कारण ऐसे हादसे हो रहे हैं। इसके लिए डीन को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। डीन की अदूरदर्शिता के कारण ही केबिल में बदलाव नहीं हो पा रहा है।


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