ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे से 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। बच्चों ने लोहे की रॉड से पिटाई, भूखा रखने और बच्चियों पर जबरन हिजाब थोपने के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशासन ने मदरसे को सील कर दिया है।

ग्वालियर के एजी ऑफिस के समीप संचालित दारुल कुरआन मदरसे में मासूम बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार और प्रताड़ना का बड़ा मामला सामने आया है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति (CWC) की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मदरसे से 26 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें 18 लड़के और 8 लड़कियां शामिल हैं। प्रशासन की अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर हड़कंप मच गया, जिसके बाद मदरसे से कई इस्लामिक साहित्य और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
रेस्क्यू किए गए बच्चों के बयान कलेक्टर रुचिका चौहान और बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा की उपस्थिति में दर्ज किए गए। अधिकारियों से बात करते समय मासूम बच्चे भावुक हो गए और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। बच्चों ने साफ़ शब्दों में कहा कि वे अब किसी भी कीमत पर उस मदरसे में वापस नहीं जाना चाहते, बल्कि वे एक सुरक्षित और भयमुक्त माहौल में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं।
मासूमों ने संस्थापकों और प्रबंधकों पर गंभीर शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। बच्चों ने बताया कि बहुत ही मामूली गलतियों पर उन्हें लोहे की रॉड से लटकाकर बेरहमी से पीटा जाता था। इसके अलावा सजा के तौर पर उनसे घंटों मुर्गा बनवाया जाता था। बच्चों के शरीरों पर मिली चोटों और उनके बयानों के आधार पर प्रशासनिक टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रताड़ना केवल मारपीट तक सीमित नहीं थी, बल्कि बच्चों को मौलिक आवश्यकताओं से भी वंचित रखा जा रहा था। बच्चों के मुताबिक, उन्हें सुबह और शाम केवल दो-दो रोटियां दी जाती थीं और अधिक खाना मांगने पर साफ मना कर दिया जाता था। वहीं बच्चियों ने आरोप लगाया कि मदरसे में आने वाली 'बाजी' उनसे अपने घर के व्यक्तिगत काम करवाती थीं। उनसे झाड़ू-पोछा लगाने, बर्तन और कपड़े धोने से लेकर टॉयलेट तक साफ करवाया जाता था। यहां तक कि छत से कपड़े उतारने में जरा सी देरी होने पर भी उनके साथ मारपीट की जाती थी।
मदरसे में रह रही बच्चियों ने मानसिक उत्पीड़न का खुलासा करते हुए बताया कि उन पर जबरन हिजाब पहनने का दबाव बनाया जाता था। यदि कोई बच्ची इसका विरोध करती, तो उसे "शैतान आ जाएगा" जैसी बातें कहकर डराया और धमकाया जाता था। बच्चियों ने यह भी उजागर किया कि यह नियम बाजी की अपनी बेटी पर लागू नहीं होता था। इसके अलावा, बच्चियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बाजी का बेटा रात के समय खिड़की से ताक-झांक करता था, जिसकी शिकायत प्रबंधन से करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
घटना के बाद प्रशासनिक टीम ने तत्काल कदम उठाते हुए दारुल कुरआन मदरसे की इमारत को सील कर दिया है। झांसी रोड एसडीएम अतुल सिंह ने जानकारी दी कि संस्था के संचालकों से मदरसा संचालन की वैधानिक अनुमति और पंजीकृत दस्तावेजों की मांग की गई है। फिलहाल बाल कल्याण समिति (CWC) द्वारा सभी 26 बच्चों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे से 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। बच्चों ने लोहे की रॉड से पिटाई, भूखा रखने और बच्चियों पर जबरन हिजाब थोपने के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशासन ने मदरसे को सील कर दिया है।
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