सिंगरौली के सोन घड़ियाल अभ्यारण में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के आरोपों ने संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों ने वन्यजीवों के आवास बचाने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

हाइलाइट्स
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
चितरंगी विकासखंड स्थित सोन घड़ि़याल अभ्यारण इन दिनों एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। अभ्यारण क्षेत्र से गुजरने वाली सोन नदी में रेत का अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण कथित रूप से व्यापक पैमाने पर जारी है। सबसे गंभीर बात यह है कि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि यह पूरा खेल अभ्यारण के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की कथित संरक्षण छाया में फल-फूल रहा है।
सूत्रों के अनुसार सोन नदी के विभिन्न हिस्सों से रात के अंधेरे में दर्जनों ट्रैक्टर रेत निकाल रहे हैं। आरोप है कि कुछ चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई कर सख्ती का दिखावा किया जाता है, जबकि बड़े कारोबारी बेखौफ होकर कारोबार चला रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रति ट्रैक्टर प्रतिरात्रि तय राशि की वसूली किए जाने की भी चर्चा क्षेत्र में आम है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवाल विभागीय कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि यह समय घड़ि़यालों और मगरमच्छों के प्रजनन का महत्वपूर्ण मौसम होता है। मादा घड़ियाल और मगरमच्छ नदी किनारे की रेतीली सतह पर अंडे देते हैं। ऐसे में यदि भारी मशीनों और वाहनों की आवाजाही तथा रेत उत्खनन जारी रहता है तो इससे उनके प्राकृतिक आवास और प्रजनन चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यह स्थिति जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है। आरोप यह भी हैं कि जब शिकायतों का शोर बढ़ता है तो अभ्यारण अमला कुछ समय के लिए सक्रिय होकर कार्रवाई करता दिखाई देता है, लेकिन उसके बाद फिर वही स्थिति लौट आती है। यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं और उन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। क्षेत्र के लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सोन घड़ियाल अभ्यारण में संरक्षण और अवैध कारोबार के बीच खड़ी यह कहानी अब कई गंभीर सवाल छोड़ रही है, जिनके जवाब जनता जानना चाहती है।
चौकी प्रभारी की भूमिका पर उठ रहे सवाल
बगदरा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर चचार्ओं का बाजार गर्म है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र के कुछ बड़े रेत कारोबारियों को कथित रूप से पुलिस संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते सोन नदी से लगातार रेत की निकासी और परिवहन का सिलसिला बेखौफ जारी है। क्षेत्र में चर्चा है कि बगदरा चौकी क्षेत्र से गुजरने वाले रेत वाहनों के लिए कथित रूप से एक तय व्यवस्था बनाई गई है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि प्रत्येक वाहन से नियमित हिसाब-किताब होने के कारण रेत कारोबारी बिना किसी भय के अपना कारोबार संचालित कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीछी क्षेत्र की सोन नदी से निकाली जा रही रेत का बड़े पैमाने पर परिवहन बगदरा क्षेत्र में किया जा रहा है और यह गतिविधियां कई महीनों से जारी हैं।
प्रजनन काल में उजड़ रहे प्राकृतिक आवास
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोन घड़ि़याल अभ्यारण का उद्देश्य दुर्लभ जल प्राणियों और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत दिखाई दे रही हैं। आरोप हैं कि अभ्यारण क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार लगातार जारी है और जिम्मेदार अमला प्रभावी रोक लगाने में विफल साबित हो रहा है।
गौरतलब है कि करीब चार वर्ष पूर्व तीन वर्षों के भीतर आधा दर्जन मगरमच्छों के अवैध शिकार के मामले भी सामने आए थे। इसके बावजूद संरक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं। अब रेत उत्खनन के कारण घड़ियाल और मगरमच्छों के प्रजनन स्थल प्रभावित होने की आशंका ने चिंता और बढ़ा दी है। इस पूरे मामले में परिक्षेत्र अधिकारी से लेकर बीट गार्ड स्तर तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने उच्चस्तरीय जांच कराकर संरक्षित वन्यजीवों के आवास और सोन नदी के पर्यावरण को बचाने की मांग की है।


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सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर अब दिखने लगा है। दरअसल चंबल अंचल के मुरैना में चंबल नदी से रेत के अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिकारी रतजगा कर रहे हैं। कलेक्टर-एसपी कभी रात में हाईवे पर वाहनों की चेंकिंग करवा रहे हैं, तो कभी चंबल के घाटों पर पहुंच रहे हैं।
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