मोदी कैबिनेट ने मॉडिफाइड उड़ान योजना के तहत 100 नए एयरपोर्ट और इमिग्रेशन सुधार (IVFRT 3.0) के लिए ₹30,640 करोड़ स्वीकृत किए। जानें पेरिस समझौते पर भारत का नया रुख।
By: Ajay Tiwari
Mar 25, 20265:38 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कुल 30,640 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और नीतिगत निर्णयों पर अपनी मुहर लगा दी है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Connectivity) में सुधार, इमिग्रेशन सेवाओं को हाई-टेक बनाना और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करना है।
कैबिनेट के फैसलों में सबसे बड़ा वित्तीय हिस्सा नागरिक उड्डयन क्षेत्र को मिला है। सरकार ने 'मॉडिफाइड उड़ान योजना' के लिए 28,840 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
लक्ष्य: टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई नेटवर्क का विस्तार करना।
नया बुनियादी ढांचा: इस योजना के तहत देश भर में 100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपैड विकसित किए जाएंगे।
प्रभाव: इससे न केवल आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा सस्ती और सुलभ होगी, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और व्यापार को भी जबरदस्त गति मिलेगी।
सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने के लिए कैबिनेट ने 'इमिग्रेशन, वीजा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग' (IVFRT 3.0) योजना के विस्तार को मंजूरी दी है।
बजट और अवधि: इस परियोजना के लिए 1,800 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी।
डिजिटल इंडिया को मजबूती: इस पहल से वीजा और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित होगी।
सुरक्षा: हाई-टेक नेटवर्क के जरिए विदेशी यात्रियों की ट्रैकिंग बेहतर होगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए वैध यात्रियों के लिए भारत आना और भी आसान हो जाएगा।
वित्तीय निवेश के अलावा, कैबिनेट ने वैश्विक पर्यावरण मंच पर भारत की भूमिका को स्पष्ट करते हुए नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन (NDC) को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
नेट जीरो लक्ष्य: यह फैसला पेरिस समझौते के तहत भारत द्वारा कार्बन उत्सर्जन कम करने के वादे को पुख्ता करता है।
कॉर्पोरेट रणनीति: इस नीतिगत मुहर के बाद, भविष्य में देश की ऊर्जा नीतियां ग्रीन एनर्जी और सतत विकास (Sustainable Development) पर केंद्रित होंगी। इससे उद्योगों को अपनी भविष्य की रणनीतियां पर्यावरण के अनुकूल बनाने में स्पष्टता मिलेगी।