भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई मापने का तरीका बदलने जा रहा है। सरकार पांच वर्षों में WPI को हटाकर उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) लागू करेगी। जानिए इसके मुख्य घटक और व्यापार पर असर।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई के आकलन को अधिक पारदर्शी और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा देश का पहला उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) डेटा जारी करने के साथ ही थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार ने इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए पांच साल का ट्रांजिशन पीरियड तय किया है, जिसका देश के नीतिगत फैसलों, औद्योगिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट जगत के कमर्शियल अनुबंधों पर गहरा असर पड़ेगा।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है, जबकि उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) फैक्ट्री गेट पर उत्पादकों द्वारा प्राप्त कीमतों को दर्शाता है, जिसमें थोक मार्जिन और टैक्स शामिल नहीं होते हैं। इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है—फैक्ट्री से निकलते समय उत्पादक को मिलने वाली कीमत PPI है, थोक बाजार में प्रवेश करने पर इसकी कीमत WPI है, और खुदरा दुकान पर उपभोक्ता जो भुगतान करता है, वह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) है।
भारत में लंबे समय से महंगाई मापने के लिए WPI और CPI का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन इनसे फैक्ट्री गेट पर उत्पादक को मिलने वाली वास्तविक कीमतों की सटीक जानकारी नहीं मिलती थी। इसके अलावा, WPI के दायरे से सेवा क्षेत्र बाहर था, जो कि देश की अर्थव्यवस्था में 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। नया PPI इस कमी को पूरी तरह दूर करेगा और भारत को अमेरिका, चीन और जापान जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष लाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों के भी पूरी तरह अनुकूल है।
मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, नई व्यवस्था में PPI के तीन मुख्य हिस्से शामिल किए गए हैं...
आउटपुट PPI (OPPI): यह उत्पादकों को उनके अंतिम उत्पाद के लिए मिलने वाली कीमतों को मापता है।
इनपुट PPI (IPPI): यह उत्पादकों द्वारा कच्चे माल के लिए चुकाई जाने वाली कीमतों को दर्शाता है (फिलहाल यह ट्रायल के तौर पर केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए है)।
सर्विस PPI (SPPI): यह बैंकिंग, सिक्योरिटीज, इंश्योरेंस, पेंशन फंड, रेलवे, हवाई यात्री परिवहन और टेलीकॉम जैसी सात प्रमुख सेवाओं की कीमतों को ट्रैक करेगा।
इसके साथ ही, WPI का आधार वर्ष (Base Year) भी 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है और इसकी कमोडिटी बास्केट को 697 से बढ़ाकर 957 आइटम कर दिया गया है।
उद्योगों में प्राइसिंग, कॉस्ट एस्केलेशन और व्यापारिक अनुबंधों के लिए लंबे समय से WPI को मुख्य बेंचमार्क माना जाता रहा है। यही वजह है कि व्यवसायों को अपने समझौतों को री-कैलिब्रेट करने के लिए पांच साल की संक्रमण अवधि दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियों को इस बदलाव का इंतजार किए बिना अभी से अपने अनुबंधों के ढांचे का पुनर्मूल्यांकन शुरू कर देना चाहिए। इसके अलावा, PPI केवल महंगाई की ट्रैकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) को भी मजबूत डेटा फीड कर रहा है और भविष्य में वास्तविक जीडीपी गणना में भी अपनी अहम भूमिका निभाएगा।

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