भारत मई में 14-15 को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। ईरानी उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के शामिल होने की उम्मीद

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
अमेरिका के साथ जारी भीषण तनाव और पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति के बीच कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर आ रही है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी जल्द ही भारत के दौरे पर आ सकते हैं। उनकी यह यात्रा नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत इस समय ब्रिक्स का चेयरमैन है और आगामी 14-15 मई को विदेश मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बैठक सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की आधारशिला रखने के लिए एक अनिवार्य कदम है। काजेम गरीबाबादी का यह संभावित दौरा भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई एक उच्च स्तरीय फोन वार्ता का परिणाम बताया जा रहा है।
तेहरान मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में देख रहा है जहाँ वह पश्चिमी दबाव के बीच अपनी कूटनीतिक बात प्रभावी ढंग से रख सके। इसी क्रम में रूस ने भी पुष्टि की है कि उसके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14 से 15 मई तक भारत में रहेंगे। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा के अनुसार, लावरोव इस यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विशेष द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे, जिसमें रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक शासन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसकी मुख्य थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण) रखी गई है। यह थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है जो मानवता को प्राथमिकता देता है और जिसका उल्लेख उन्होंने 2025 के रियो डी जेनेरो समिट में किया था।
रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक न केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगी, बल्कि उन विकासशील देशों की आवाज़ भी बुलंद करेगी जो दुनिया की एक बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। 18वें ब्रिक्स समिट की तैयारियों के साथ-साथ यह बैठक वैश्विक मंच पर सत्ता के संतुलन और रणनीतिक सहयोग को एक नई दिशा दे सकती है。

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लक्षद्वीप के पास कोस्ट गार्ड और गुजरात एटीएस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में ईरानी नाव से 5 पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया। नाव से ₹3000 करोड़ की ड्रग्स बरामद हुई है।
दुबई से तेल अवीव जा रहे एक यात्री विमान को हाईजैक कर लेने की खबर सामने आई है। इस विमान को सऊदी अरब की ओर मोड़ दिया गया है। इजरायल के Ynet की रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान के दौरान विमान ने एक इमरजेंसी सिग्नल भेजा।
भारत और अमेरिका के रिश्तों में जमी बर्फ और दोनों देशों के बीच कायम दूरी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। जयशंकर ने अमेरिका के ढुलमूल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा-यदि कोई मुद्दा (सुरक्षा) हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और हमारा सहयोगी देश हमारी उन चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाता, तो जाहिर तौर पर इससे रिश्तों में तनाव और जटिलता पैदा होगी।
रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का एक नया और खतरनाक दौर शुरू हो गया है। यूक्रेनी सेना ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड ग्राउंड रोबोट्स (आत्मघाती जमीनी रोबोट) का इस्तेमाल कर रूसी ठिकानों पर विनाशकारी हमले का दावा किया है।
ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर में RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के पास सुरक्षा एजेंसियों ने विस्फोटक संबंधी अपराधों के शक में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसे 'बड़ी घटना' घोषित कर जांच तेज कर दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की ओर से दिए गए युद्ध खत्म करने और स्ट्रेट आफ होर्मुज को खोलने के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान इस वक्त आर्थिक और सैन्य रूप से भारी दबाव में है। इसी वजह से वह जल्दबाजी में समझौता करना चाहता है।
अमेरिकी नौसेना ने हाल के हफ्तों में ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों से अपने बड़े जहाज हटा दिए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि ओमान की खाड़ी और अरब सागर में कोई अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर या डेस्ट्रॉयर मौजूद नहीं है। सितंबर की शुरुआत से ये जहाज वहां से गायब हो गए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने के लिए 7 दिवसीय योजना का प्रस्ताव रखा है।
व्यापार, तकनीक और रणनीतिक मतभेदों के बीच अमेरिका और चीन के रिश्तों में एक सकारात्मक नरमी देखने को मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में बेहद गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई। इस अवसर पर ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का राजकीय स्वागत किया ।
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