ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिका पर संदिग्ध मंशा का आरोप लगाया है। होर्मुज में नाकाबंदी और गुरुवार को होने वाली संभावित पीस डील पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

अयोध्या/वॉशिंगटन। स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक जंग तेज हो गई है। भारत दौरे पर आए ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिका की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अयोध्या में मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका की नीयत शुरू से ही संदिग्ध रही है और वह समाधान के बजाय ईरान पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा है।
अब्दुल मजीद ने अमेरिका के दोहरे मापदंडों पर प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ वॉशिंगटन दुनिया के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए खुला रखने की वकालत करता है, वहीं दूसरी ओर वहां खुद नाकाबंदी कर रहा है। उन्होंने कहा, "अमेरिका बातचीत का ढोंग कर रहा है, जबकि असल में वह दबाव बनाकर अपनी एकतरफा शर्तें मनवाना चाहता है। ईरान युद्ध का हिमायती नहीं है और हमेशा शांति का समर्थन करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।"
तल्खी के बावजूद, राजनयिक माध्यमों से शांति की कोशिशें जारी हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार तक अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की उच्च स्तरीय बैठक होने की प्रबल संभावना है। इस चर्चा के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद या स्विट्जरलैंड के जेनेवा को चुना जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से तारीख और सटीक स्थान को अभी गुप्त रखा गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पहले दौर की वार्ता हुई थी, जो बिना किसी ठोस नतीजे या समझौते के समाप्त हो गई थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की बढ़ती सक्रियता और ईरान के कड़े रुख ने वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार को चिंता में डाल दिया है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि होर्मुज से होकर गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। गुरुवार की प्रस्तावित बैठक को इस तनाव को कम करने की आखिरी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।

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