सतना जिले में कोदो की रोटी खाने के बाद दो परिवारों के सात लोग अचानक बीमार हो गए, जिनमें एक बुजुर्ग कोमा में जाने पर वेंटिलेटर तक पहुंच गया। चिकित्सकों ने बताया कि लंबे समय तक रखे या फंगस लगे कोदो में मौजूद टॉक्सिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा करता है। दोनों परिवारों के रोगियों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
कोदो की रोटी खाने के बाद दो अलग-अलग परिवारों के 7 लोग बीमार हो गए हैं, जिन्हेइलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से एक की हालत गंभीर होने पर आईसीयू में भर्ती कराया गया है, इसके अलावा अन्य मरीजों को वार्ड में भर्ती किया गया है। दोनों परिवार के मरीजों को अलग-अलग दिन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीमार लोगों में एक ही परिवार के दम्पति, पुत्र और बहु जबकि अन्य परिवार के दम्पति और पारिवारिक सदस्य शामिल हैं।
उल्टियां हुईं और बंद हो गया दिखना
मिली जानकारी के मुताबिक जिले के मझगवां थाना अंतर्गत म्यान सिंहपुर गांव में एक परिवार के चार सदस्यों, धनपत सिंह पिता रामसजीवन सिंह उम्र 70 वर्ष, जयकरण पिता धनपत उम्र 30 वर्ष, गीता पति जयकरण एवं पुत्रबधु निर्मला को कोदो की रोटी पकाकर खाना भारी पड़ गया। कोदो की रोटी खाने के आधे घंटे बाद ही परिवार के सभी 4 सदस्यों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और सबको चक्कर के साथ उल्टियां आनी शुरू हो गई थी। एक-एक करके सभी को दिखना भी बंद हो गया था। पड़ोसियों की मदद से सभी को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। इसके बाद इन सभी को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
क्या कहते हैं चिकित्सक
जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि वैसे तो कोदो एंटीआॅक्सीडेंट और फास्फोरस से भरपूर और बेहद कम कोलेस्ट्रॉल वाला फायदेमंद मिलेट्स है। लेकिन लंबे समय से रखे कोदो में फंगस लगने से यह हानिकारक हो जाता है। इस फंगस युक्त कोदो को खाने से न्यूरोलॉजिकल कॉम्प्लिकेशन बढ़ जाते हैं क्योंकि इसमें टोक्सिन नामक विषाणु पाया जाता है जोकि शरीर के लिए नुकसान दायक है। उन्होंने बताया कि लाल परत और हरी परत वाला कोदो हानिकारक है। कोदो का उपयोग करते समय हमेशा लाल परत को निकालकर उसका उपयोग करना चाहिए। क्योंकि, लाल परत फूड प्वाइजनिंग का कारण बन सकती है। कोदो के ऊपर एक हरी परत तब बनती है, जब कोदो बहुत ज्यादा पुराना हो या उसमें नमी और फंगस आ जाती है। ऐसे कोदो का प्रयोग करने से भी व्यक्ति बीमार हो जाता है। मरीज को उलटी-दस्त और दिमाग में विकार तक उतपन्न हो जाते हैं। अगर कोदो बहुत अधिक पुराना हो गया है, तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए। अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो वे फूड प्वाइजनिंग और बीमार होने से बच सकते हैं।
कोमा में चले जाने के कारण वेंटिलेटर में शिफ्ट करना पड़ा
चिकित्सकों ने बताया कि सिंहपुर गांव के चारो सदस्यों को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। सभी मरीज बेहोशी की हालत में लाये गए थे इस परिवार के सबसे बुजुर्ग धनपत सिंह पिता रामसजीवन सिंह उम्र 70 वर्ष, की हालत ज्यादा गंभीर थी, कोमा में चले जाने के कारण इन्हे वेंटिलेटर में शिफ्ट करना पड़ा। बताया गया कि धनपत के होश मेंआने पर वेंटिलेटर से हटाकर आईसीयू में ही सामान्य आॅक्सीजन में रखा गया। अगर मरीज की हालत अब सामान्य रहती है तो उसे शुक्रवार को डिस्चार्ज कर दिया जायेगा। इसके अलावा इस परिवार के अन्य सदस्यों को पहले ही सामान्य वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। स्वस्थ मिलने पर इन्हे गुरुवार को डिस्चार्ज भी कर दिया गया।
एक साल पहले सुखाकर रखे कोदो को पिसा कर बनाई थी रोटी
इसी प्रकार बुधवार की रात भी एक ही परिवार के तीन लोग के बीमार होने का मामला सामने आया, जिसमे बताया गया कि नागौद थाना अंतर्गत इटौरा खुर्द के 3 मरीजों की तबियत भी कोदो की रोटी खाने से बिगड़ी थी। परिजनों के मुताबिक राम भैया लोधी उम्र 70 वर्ष, रामपति लोधी पत्नी राम भैया लोधी उम्र 65 वर्ष एवं एक अन्य पारिवारिक सदस्य को बेहोशी की हालत में नागौद सिविल अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। बताया गया कि रामपति लोधी पत्नी राम भैया लोधी की हालत सामान्य होने के चलते वहीं भर्ती कर लिया गया जबकि अन्य दो की हालत नाजुक होने पर उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचे दोनों मरीजों को पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया था। दोनों मरीजों की हालत सामान्य थी। बीमार मरीजों के परिजनों ने बताया कि बीते वर्ष कोदो सुखाकर रख लिया गया था जिसे पिसाकर रोटी बनाने के लिए उपयोग किया गया था।


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