सिंगरौली में खनिज संपदाओं के दोहन के नाम पर वर्षों से लूट मची है। कोयले और रेत से सरकारी खजाना भर रहा है लेकिन स्थानीय जनता को मिला सिर्फ प्रदूषण, हादसे और उजड़ा जीवन। विकास के नाम पर सिंगरौली को बार-बार ठगा गया है।

हाइलाइट्स
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
श्रृंगीऋषि की तपोभूमि जिसे कभी काला पानी कहा जाता था अब सिंगरौली जिला हो गया है। इस जिले पर लगे कालापानी का दाग मिटाने के लिए कई दशक से तरह-तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। इस कालापानी का दाग मिटाने की नींव तब रखी गई जब दशकों पूर्व पता चला कि इस कालापानी के गर्भ में बेशकीमती खनिज संपदा रूपी खजाना छिपा हुआ है। फिर क्या शुरू हो गया खनिज संपदाओं का दोहन, यह सिलसिला कई वर्षों से जारी है। इन दिनों स्थिति यह निर्मित हो गई है की सिंगरौली के गर्भ से जगह-जगह खजाने निकल रहे हैं और व्यापक पैमाने पर उत्खनन हो रहा है। इन खनिज संपदाओं से राजस्व के रूप में सरकार की भी तिजोरी भर रही है लेकिन बदले में विकास का प्रलोभन देकर अभी तक सिंगरौली को सिर्फ ठगा गया है। सिंगरौली के कोयले से तमाम औद्योगिक कारखाने चल रहे हैं। वहीं सिंगरौली में सिर्फ कोयले का धुआं और कोयला परिवहन करने वाले वाहनों से सड़क हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा सिंगरौली जिले में नामी गिरामी बड़ी-बड़ी औद्योगिक कंपनियों के स्थापित होने से हजारों सिंगरौली वासियों के घर उजड़ गए जमीन भी चली जिनकी जमीन बची भी हैं वे फसल पैदावार करने योग्य नहीं रह गई हैं। क्योंकि कोयले की मोटी परत जमीन को बंजर बना रही है।
व्यापक पैमाने पर हो रहा रेत का अवैध उत्खनन
कोयले के अलावा सिंगरौली जिले में रेत का भी उत्खनन व्यापक पैमाने पर होता है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों की नदियों में पर्याप्त रेत का भंडारण रहता है। जहां रेत की खदानें निर्धारित हैं। लेकिन उत्खनन करते समय यह नहीं देखा जाता की रेत किस जगह से उत्खनन किया जा रहा है। जहां मर्जी वहीं से उत्खनन होता है। खदानों का सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया इतनी गोपनीय रहती है कि किसी को भनक नहीं लगती और रेत उत्खनन करने वाले जहाँ मर्जी वहीं खदान बना लेते हैं।
सिंगरौलीवासियों को मिल रही मौतें
इसके अलावा हवाओं में कोल डस्ट रूपी जहर घुल चुका है। लोग तरह-तरह के गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। लोगों की आयु कम होती जा रही है। सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। प्रतिदिन कहीं ना कहीं सड़क हादसे में लोगों की बलि चढ़ रही है। अब सिंगरौली वासियों के समझ में यह नहीं आ रहा है कि यहां का कोयला सिंगरौली वासियों के लिए वरदान साबित हो रहा है या अभिशाप।
जिम्मेदारों ने आंखों में लगा लिया काला चश्मा
खनिज संपदाओं के अवैध कारोबार तथा इस कारोबार से व्याप्त समस्याओं के प्रति जिम्मेदार अक्सर मौन धारण किए रहते हैं। बड़े नेता विकास के नाम पर अभी तक तरह-तरह का प्रलोभन देते आ रहे हैं और स्थानीय जिम्मेदार भी बड़े नेताओं का दिया हुआ भाषण दोहराते हैं । जमीनी स्तर पर ना तो ये नेता गंभीर नजर आते और ना ही प्रशासन।
विकास के नाम पर सिंगरौली में मची है लूट
करीब दो दशक से सिंगरौली जिले में विकास के नाम पर कभी सिंगापुर बनाने का सपना दिखाया गया कभी स्मार्ट सिटी बनाने का प्रलोभन देकर लूट मचा हुआ है। जमीनी स्तर पर सिंगापुर तथा स्मार्ट सिटी की झलक दूर-दूर तक नजर नहीं आती। इतना जरूर है कि इस प्रलोभन से वोट बैंक जरूर मजबूत हो जाता है।

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