रीवा में एक भावुक दृश्य सामने आया जब एक बेटा अपनी अपंग मां को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचा। सरकारी कागज़ों में जीवित मां को मृत घोषित कर दिया गया था। बेटा अधिकारियों से गुहार लगाता रहा—"मेरी मां को फिर से ज़िंदा कर दो साहब।" प्रशासनिक लापरवाही की यह तस्वीर मानवता को झकझोरने वाली है।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
मंगलवार को जनसुनवाई में एक पुत्र अपनी मां को गोद में उठाए कलेक्ट्रेट पहुंच गया। मां चलने फिरने में असक्षम थी। बेटा सिर्फ मां को कलेक्ट्रेट प्रशासनिक लापरवाही का नमूना दिखाने लेकर पहुंचा था। बुजुर्ग मां को समग्र में मृत दिखा दिया गया था। जिस उम्र में शासन की योजनाओं की बुजुर्ग महिला को जरूर थी। उस उम्र में प्रशासन के नुमाइंदों ने ऐसा काम किया कि पूरा परिवार ही हिल गया। महिला को मृत घोषित कर दिया गया। बेटा अधिकारियों के पास मां को फिर से जिंदा करने की गुहार लगाने पहुंचा था।
अभी तक सतना ही आय प्रमाण पत्र के मामले में सुर्खियों में रहा लेकिन रीवा के प्रशासनिक अधिकारियों ने सतना को लापरवाही के मामले में मात दे दी है। यहां अधिकारियों ने ऐसा कारनामा कर दिया कि इसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। यहां जिंदा आदमी को ही मृत घोषित कर दिया गया है। यह रीवा का ऐसा पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में बुजुर्ग खुद को जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट चुका है। अब नया मामला गढ़ का सामने आया है। 64 वर्षीय देववती सिंह चल नहीं पाती। वह अपंग हो गई हैं। उन्हें बेटा पिंकू सिंह गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। जनसुनवाई में पहुंचे युवक ने प्रशासनिक अधिकारियों के लापरवाही की पोल खोल दी। बेटे ने बताया कि उनकी मां को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। उन्हें शासन से जो योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। वह नहीं मिल रहा है। दोबारा से महिला को आन द रिकार्ड जिंदा करने के लिए 3 हजार रुपए की मांग की जा रही थी। सिस्टम की लापरवाही से परेशान युवक चलने फिरने में असहाय मां को गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुंच गया। युवक ने गांव के सचिव पर लापरवाही का आरोप लगाया है।


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