NFHS-6 के नए आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में बाल विवाह की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट। जानिए ग्रामीण-शहरी अंतर और आगर मालवा, हरदा, राजगढ़ जैसे जिलों के आंकड़े।

मध्य प्रदेश में बाल विवाह (Child Marriage) जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए तमाम प्रशासनिक प्रयास और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, फिर भी राज्य के कई जिलों में स्थिति अब भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। हाल ही में सामने आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि हालांकि राज्य स्तर पर समग्र स्थिति में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन कुछ जिलों में यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है।
इस रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक तस्वीर आगर मालवा जिले से सामने आई है। यहाँ 20 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की 49.4 फीसदी महिलाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले ही कर दिया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि जिले में इस आयु वर्ग की करीब हर दूसरी शादी बालिग होने से पहले हो रही है। NFHS-6 के अनुसार, आगर मालवा का यह अनुपात NFHS-5 के 35.6 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 49.4 प्रतिशत पर पहुँच गया है। महज पाँच साल के भीतर यहाँ 13.8 प्रतिशत अंक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो प्रदेश के सभी जिलों में सबसे अधिक है।
राज्य के समग्र आंकड़ों पर नजर डालें तो मामूली सुधार नजर आता है। NFHS-5 में जहाँ प्रदेश की 23.1 फीसदी महिलाओं का विवाह 18 साल से पहले हुआ था, वहीं NFHS-6 में यह अनुपात घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। यानी राज्य स्तर पर 3.1 प्रतिशत अंक की कमी आई है। इसके बावजूद, यह तथ्य परेशान करने वाला है कि प्रदेश में अब भी हर 5 में से 1 महिला का बाल विवाह हो रहा है।
तुलनात्मक विश्लेषण करने पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक चौड़ी खाई दिखाई देती है....
शहरी क्षेत्र: NFHS-6 के अनुसार शहरों में केवल 9 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई।
ग्रामीण क्षेत्र: गाँवों में यह अनुपात बढ़कर 23.4 प्रतिशत दर्ज किया गया।
ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह की समस्या शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ढाई गुना से भी अधिक गंभीर है।
NFHS-6 के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में बाल विवाह के मामलों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं:
बढ़ते मामलों वाले प्रमुख जिले:
हरदा: यहाँ NFHS-5 के 10% के मुकाबले NFHS-6 में यह आंकड़ा बढ़कर 20.8% हो गया (10.8% की वृद्धि)।
खंडवा: यहाँ अनुपात 10.8% से बढ़कर 16.9% (6.1% की वृद्धि) हो गया।
सतना: यहाँ आंकड़ा 12.9% से बढ़कर 18.4% (5.5% की वृद्धि) दर्ज किया गया।
बैतूल: यहाँ बाल विवाह का अनुपात 11.2% से बढ़कर 16.2% पहुँच गया।
सुधार दर्ज करने वाले प्रमुख जिले:
राजगढ़: यहाँ सबसे बड़ी राहत देखने को मिली है, जहाँ NFHS-5 के 46% के मुकाबले आंकड़ा घटकर 23% रह गया (23% अंकों की ऐतिहासिक गिरावट)।
छतरपुर: यहाँ 39.2% से घटकर 22.5% (16.7 अंक की कमी) दर्ज हुई।
श्योपुर: यहाँ अनुपात 39.5% से गिरकर 25.3% पर आ गया।
रीवा और इंदौर: रीवा में यह अनुपात 28.2% से घटकर 14.9% और इंदौर में 21.7% से घटकर 10.6% रह गया है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ये आंकड़े 20 से 24 वर्ष की महिलाओं के विवाह की कुल स्थिति को दर्शाते हैं, इसलिए इन्हें किसी एक विशेष वर्ष में दर्ज हुए मामलों की संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके अलावा, NFHS-6 की यह फैक्टशीट अभी प्रोविजनल (अंतिम रूप से पुष्ट नहीं) है, जिसके चलते छोटे सैंपल साइज वाले कुछ संकेतकों का विश्लेषण करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। फिर भी, यह रिपोर्ट समाज और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि बाल विवाह की जड़ें अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

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