जबलपुर के बरगी डैम हादसे में 13 मौतों के बाद नया विवाद शुरू हो गया है। नागरिक उपभोक्ता मंच ने क्रूज संचालन में तकनीकी और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा, जिसमें 13 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं, अब एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया है. इस दुखद घटना में नागरिक उपभोक्ता मंच ने गंभीर अनियमितताओं और साक्ष्यों को मिटाने के चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. मंच ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे.
नागरिक उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे का दावा है कि इस क्रूज का संचालन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन कर किया जा रहा था. NGT के मानकों के अनुसार, जलाशयों में केवल 'फोर-स्ट्रोक' इंजन वाली नावों को ही चलाने की अनुमति है, जबकि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज इन मानकों को पूरा नहीं करता था. इसके अलावा, मंच ने यह भी आरोप लगाया है कि क्रूज का एक इंजन पहले से ही खराब था और हादसे के दिन पानी के बीच में इंजन पूरी तरह ठप्प पड़ जाने के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई.
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप साक्ष्यों से छेड़छाड़ को लेकर है. डॉ. नाजपांडे के अनुसार, विस्तृत जांच होने से पहले ही क्रूज को तोड़कर नष्ट कर दिया गया. हालांकि अधिकारियों ने दलील दी कि शवों की तलाश के लिए क्रूज को डिस्मेंटल किया गया, लेकिन मंच का कहना है कि गोताखोर पहले ही पुष्टि कर चुके थे कि अंदर कोई शव नहीं बचा है. ऐसे में क्रूज को आनन-फानन में तोड़ना सबूत मिटाने की कोशिश की ओर इशारा करता है.
मप्र टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने पहले यह दावा किया था कि नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में क्रूज चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति अनिवार्य नहीं है. नागरिक उपभोक्ता मंच ने इस दावे को पूरी तरह गलत करार देते हुए NGT के 12 सितंबर 2023 के आदेश का हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से पर्यावरणीय नियमों और प्रदूषण बोर्ड की गाइडलाइन्स के पालन की अनिवार्यता बताई गई है.
यह हृदयविदारक घटना 30 अप्रैल को घटित हुई थी, जब मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का क्रूज अचानक बरगी डैम में डूब गया. इस हादसे में कुल 13 पर्यटकों की मौत हुई, जिनमें 4 बच्चे और 8 महिलाएं शामिल थीं. बचाव दल ने 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई थी, जबकि मृतकों के शव अगले चार दिनों तक लगातार सर्च ऑपरेशन के दौरान मिलते रहे.
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