उज्जैन महाकाल मंदिर में होली का उत्सव और 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण का प्रभाव। जानें भस्म आरती की परंपरा और ग्रहण के बाद शुद्धिकरण का समय।
By: Star News
Mar 03, 202611:25 AM
उज्जैन। स्टार समाचार वेब
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज होली का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व की शुरुआत विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती से हुई, जहाँ बाबा महाकाल को विशेष रूप से हर्बल गुलाल और शक्कर की माला अर्पित की गई। सुरक्षा कारणों और पिछले साल हुए हादसे को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने इस बार श्रद्धालुओं के गुलाल ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, लेकिन भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
होली के पावन अवसर पर मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर, कोटेश्वर, रामेश्वर और वीरभद्र को गुलाल अर्पित किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में बाबा महाकाल को मखाने और शक्कर की माला धारण कराई गई। परंपरा के अनुसार, विश्व की सबसे पहली होलिका का पूजन और दहन महाकाल मंदिर परिसर में ही संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने केवल दर्शन और आरती का लाभ लिया, जबकि गर्भगृह में केवल पुजारियों द्वारा ही गुलाल अर्पण की रस्म निभाई गई।
आज फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर एक विशेष खगोलीय संयोग बन रहा है। मंगलवार, 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक (कुल 14 मिनट) चंद्रग्रहण का प्रभाव रहेगा।
सूतक काल: ग्रहण का वेधकाल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो गया है।
पूजन क्रम: ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं में विशेष बदलाव किए गए हैं। सूतक और ग्रहण के समय पुजारी या श्रद्धालु भगवान की प्रतिमा को स्पर्श नहीं करेंगे।
शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद (शाम 6:46 के उपरांत) पूरे मंदिर परिसर और सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक कर शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद संध्या आरती संपन्न होगी।
पं. महेश पुजारी के अनुसार, महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे ग्रहण का प्रभाव क्षीण रहता है, फिर भी शास्त्रोक्त मर्यादाओं का पालन करते हुए मंत्रोच्चार और जलाभिषेक की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।