नवरात्रि मेले के दौरान मैहर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए लगाए गए आश्रय पंडाल बारिश और आंधी में ढह गए। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं नवनिर्मित स्टेशन में पहली ही बारिश में जगह-जगह रिसाव शुरू हो गया। स्टेशन परिसर के बाहर सड़कों के जलमग्न होने से श्रद्धालु परेशान हैं। बैठकें होने के बावजूद नगर परिषद और प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल गई।

हाइलाइट्स
मैहर, स्टार समाचार वेब
नवरात्रि मेले के दौरान मां शारदा के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु मैहर पहुंच रहे हैं। इसी बीच गुरूवार तड़के बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सुबह करीब 4:30 बजे तेज बारिश और आंधी के चलते मैहर रेलवे स्टेशन के सामने यात्रियों के लिए लगाए गए आश्रय पंडाल अचानक ध्वस्त हो गए। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, वरना यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के वक्त पंडाल के नीचे बड़ी संख्या में यात्री अपने परिजनों और बच्चों संग बैठे थे। पंडाल गिरते ही स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
स्टेशन में जगह-जगह पानी, उधर सड़कें भी जलमग्न
तेज बारिश के चलते नवनिर्मित मैहर रेलवे स्टेशन के भीतर जगह-जगह पानी रिसाव से यात्री परेशान हैं। गौरतलब है कि हाल ही में स्टेशन को विकसित करते हुए प्लेटफार्म क्र. 1 के सतना एंड व प्लेटफार्म दो के कटनी एंड की ओर विकास कार्य कराए गए हैं, लेकिन काम की क्वालिटी इतनी घटिया है कि पहली ही बरसात में स्टेशन जगह-जगह चूने लगा है। मैहरपुहचने वाले श्रद्धालुओं की तकलीफें स्टेशन के बाहर भी कम नहीं हुई। जैसे ही उन्होने स्टेशन परिसर के बाहर कदम रखा जलमग्न सड़कों से उनका सामना हुआ। जानकारों का कहना है कि नाले पर अवैध अतिक्रमण और सफाई के अभाव में पानी की निकासी नहीं हो पाती। यही कारण है कि हर बारिश में ऐसी स्थिति निर्मित होती है, लेकिन प्रशासन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।
बैठकें रहीं बेनतीजा, प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
नवरात्रि मेला प्रारंभ होने के पूर्व बड़ी बड़ी बैठकें मैहर में हुईं जिसमें जनप्रतिनिधियों के अलावा कलेक्टर, एसपी समेत कई विभाग के अधिकारी भी मैजूद रहे। छोटे से लेकर बड़े स्तर तक आयोजित हर बैठकों में मेला के बेहतर संचालन के लिए बड़े-बड़े निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने भी बड़े बड़े दावे किए कि मेला व्यवस्था चाक चौबंद होगी लेकिन मेला प्रारंभ होते ही कमियां सामने आने लगी हैं। जलमग्र सड़कें बताती हैं कि नाली व नालों तक की परिषद द्वारा सफाई नहीं कराई गई जिससे यह स्थितियां निर्मित हुईं। स्टेशन में पंडाल पहुंचने से आपदा प्रबंधन पर भी सवाल हादसे के बाद देर तक प्रशासनिक अधिकारियों के घटनास्थल तक नहीं उठ रहे हैं।


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