सतना के मझगवां वनपरिक्षेत्र में बाघ संरक्षण को नई तकनीकी ताकत मिलने जा रही है। मार्च 2026 से पूरे रेंज में 200 अत्याधुनिक ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे बाघों की गतिविधियों, सुरक्षा और अवैध शिकार पर प्रभावी निगरानी संभव होगी।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
वनमंडल का मझगवां वनपरिक्षेत्र आगामी मार्च 2026 से अत्याधुनिक ट्रैप कैमरा निगरानी प्रणाली से लैस होने जा रहा है। बाघों की बढ़ती संख्या और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने पूरे रेंज में लगभग 200 ट्रैप कैमरे लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। यह प्रदेश का पहला वनक्षेत्र होगा, जहां इतने बड़े स्तर पर कैमरे एक साथ तैनात किए जा रहे हैं। इस पहल से मझगवां की जैविक संपदा की निगरानी आसानी से हो सकेगी और शिकारियों की गतिविधियों पर भी असरदार रोक लगाई जा सकेगी। मझगवां रेंज लंबे समय से बाघों की उपस्थिति के कारण सुर्खियों में रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार यहां तीन दर्जन से ज्यादा बाघ विचरण करते हैं। खासकर सरभंगा बीट में बाघों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है, जहां कई बार ग्रामीणों ने बाघों को सड़क पार करते हुए देखा है। लगातार बढ़ रहे बाघों के कुनबे और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग अतिरिक्त सतर्कता बरतने की कोशिशों में जुटा है। इसी कड़ी में पूरे रेंज को ट्रैप कैमरों के जाल से कवर करने का फैसला लिया गया है, जिससे बाघों की मूवमेंट, स्वास्थ्य तथा व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा सके।
बाघ संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
ट्रैप कैमरों के जरिए वन विभाग को बाघों की सटीक गिनती, जन्म दर, स्वास्थ्य स्थिति तथा क्षेत्रीय दावों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। यह जानकारी टाइगर कंजर्वेशन प्लान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। कैमरे शिकारियों की गतिविधियों पर भी करारी चोट करेंगे। किसी भी बाहरी व्यक्ति, वाहन या संदिग्ध मूवमेंट की तस्वीरें स्वत: रिकॉर्ड होंगी। इससे अवैध शिकार रोकने में विभाग को ठोस सबूत मिलेंगे। वन विभाग का मानना है कि यह तकनीकी उन्नयन मझगवां रेंज को प्रदेश के सबसे सुरक्षित वनक्षेत्रों में बदल देगा। कैमरा नेटवर्क सक्रिय होने के बाद बाघों की सुरक्षा में कई गुना बढ़ोतरी होगी और जंगल में अवैध घुसपैठ पर लगभग पूर्ण नियंत्रण संभव हो सकेगा। नए वर्ष में इस परियोजना के शुरू होते ही मझगवां रेंज आधुनिक निगरानी तंत्र से सुसज्जित हो जाएगा, जो बाघ संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है।
कैसे लगाए जाएंगे ट्रैप कैमरे?


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