मुरैना के बानमोर में नेशनल हाईवे-44 पर फ्लाईओवर निर्माण की मांग को लेकर जारी अनशन सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। सांसद ने प्रशासनिक अनदेखी पर नाराजगी जताई।

मुरैना।स्टार समाचार वेब
बानमोर कस्बे के बीच से गुजरने वाले नेशनल हाईवे क्रमांक 44 पर लगातार हो रहे जानलेवा हादसों ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सुरक्षा और फ्लाईओवर ब्रिज की मांग को लेकर क्षेत्रवासी पिछले तीन दिनों से कड़ाके की ठंड में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। स्थिति तब गंभीर हो गई जब सत्येंद्र फागुना नामक युवक ने मांगों को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा।
ठिठुरती रातें और प्रशासनिक बेरुखी
धरना दे रहे लोगों का आरोप है कि भीषण सर्दी के बावजूद वे रात-दिन टेंट लगाकर बैठे रहे, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। हाईवे पार करते समय हर महीने होने वाली मौतों से आहत ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तीन दिनों तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने धरना स्थल पर आकर ज्ञापन तक लेना उचित नहीं समझा। बताया जा रहा है कि लोग तहसीलदार से मिलने भी गए, लेकिन वे कार्यालय में मौजूद नहीं मिलीं।
सांसद ने खत्म कराया अनशन
क्षेत्रीय सांसद शिवमंगल सिंह तोमर धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले आमरण अनशन पर बैठे सत्येंद्र फागुना को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। लोगों की समस्या सुनने के बाद सांसद ने स्पष्ट किया कि बानमोर के लिए सिक्स लेन प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका है, जिसका काम जल्द शुरू होगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि फ्लाईओवर की मांग को लेकर वे प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली जाकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात करेंगे।
फोन कर जताई कड़ी नाराजगी
धरना स्थल से ही सांसद तोमर ने जिला कलेक्टर को फोन लगाकर प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही पर जमकर क्लास लगाई। उन्होंने विशेष रूप से बानमोर तहसीलदार की अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें 'ढीठ' तक कह डाला। सांसद ने फोन पर कहा, "मैं मुरैना से चलकर यहां आ गया, लेकिन तहसीलदार ग्वालियर से यहां नहीं पहुंच सकीं। अगर वे चाहतीं तो एसडीएम या आपसे चर्चा कर ज्ञापन ले सकती थीं, लेकिन यह प्रशासनिक ढीठपन है।" सांसद के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद फिलहाल धरना समाप्त कर दिया गया है।
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