बिहार की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश में भी वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) होगा। चुनाव आयोग ने इसकी घोषणा कर दी है। जानें क्या है एसआईआर, कौन से दस्तावेज मांगे जाएंगे और क्यों हो रहा यह गहन पुनरीक्षण।

हाइलाइट्स
भोपाल. स्टार समाचार
बिहार की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश (MP) में भी मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी गहन पुनरीक्षण शुरू हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर एसआईआर प्रक्रिया लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके तहत, हर मतदान केंद्र (बूथ) की वोटर लिस्ट की गहनता से जांच की जाएगी और प्रत्येक मतदाता का सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाएगा।
आयोग के निर्देश के बाद राज्य में प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) कार्य पूरा हो चुका है। आज रात 12 बजे से मतदाता सूची फ्रीज हो जाएगी। इसके बाद, बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करेंगे। बीएलओ को एक घर पर कम से कम तीन बार जाना होगा।
कलेक्टर, एसडीएम, एडीएम, तहसीलदार, बीएलओ समेत मतदाता सूची के अद्यतन (अपडेशन) से जुड़े सभी अधिकारी-कर्मचारियों का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। अब हर बूथ की मतदाता सूची की जांच होगी, और संदिग्ध पाए जाने वाले लोगों से आवश्यक दस्तावेज मांगे जाएंगे। अनुमान है कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव साल 2028 में अक्टूबर या नवंबर में होने हैं।
तैयारी और कर्मचारियों की ड्यूटी
इस गहन प्रक्रिया के लिए आवश्यक तैयारियां पहले से ही चल रही थीं। विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों को बीएलओ के कार्य के लिए नियुक्त करने के आदेश जारी किए गए थे। उदाहरण के लिए, भोपाल जिला मलेरिया कार्यालय के लगभग सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के ड्यूटी आदेश दिवाली से पहले ही जारी किए जा चुके थे।
एसआईआर में क्या होगा? मुख्य बातें:
चुनाव आयोग अब तक औसतन 22 साल में एक बार वोटर लिस्ट का एसआईआर करवाता रहा है। पिछली बार यह 2003-04 में हुआ था। एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में शामिल हर व्यक्ति की गहनता से जांच करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई गलत व्यक्ति वोटर न हो और किसी का नाम एक से अधिक जगह पर दर्ज न हो।
2003-04 की मतदाता सूची से मिलान किया जाएगा कि उस समय आपके परिवार के लोग कहाँ थे। जिन लोगों के नाम का मिलान नहीं होगा या जो संदिग्ध पाए जाएंगे, उन्हें नोटिस जारी करके दस्तावेज मांगे जाएंगे। इस प्रक्रिया में बिहार के एसआईआर में मान्य 11 दस्तावेज ही राजस्थान में भी मान्य थे (संकेत है कि MP में भी इसी तर्ज पर दस्तावेज मांगे जा सकते हैं)।
नए वोटर बनने या दूसरे राज्य से शिफ्ट होकर आए लोगों को एक डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। जन्मतिथि के आधार पर सख्त नियम लागू होंगे:
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