नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भिंड और दतिया जिलों में सिंध नदी पर चल रहे अवैध रेत खनन पर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।

मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों से गुजरने वाली सिंध नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत खनन के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के न्यायिक सदस्य जस्टिस शेव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार तथा अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर औपचारिक जवाब तलब किया है। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने जमीनी हकीकत का पता लगाने और कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति का गठन भी कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग के सचिव द्वारा नामित प्रतिनिधि और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के अधिकारियों को शामिल कर एक संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। ट्रिब्यूनल ने इस समिति को आदेशित किया है कि वह प्रभावित इलाकों का दौरा करे और छह सप्ताह के भीतर अपनी तथ्यात्मक एवं की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सौंपे।

याचिकाकर्ता डॉ. गोविंद सिंह की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि चंबल-यमुना प्रणाली की प्रमुख सहायक नदी 'सिंध' में भारी मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग उपकरणों से लैस नावों के जरिए नदी की मुख्य धारा के भीतर से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। यह अवैध कारोबार भिंड जिले के 18 और दतिया जिले के 6 गांवों में खुलेआम संचालित हो रहा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना किसी वैध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) या पर्यावरण मंजूरी के निकाली जा रही इस रेत को बिना वैध ट्रांजिट परमिट के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की संदिग्ध संलिप्तता को लेकर एक प्रारंभिक सतर्कता (विजिलेंस) जांच भी शुरू की जा चुकी है।
सुनवाई के दौरान यह दलील भी प्रमुखता से रखी गई कि मध्य प्रदेश सरकार पूर्व में एनजीटी द्वारा 'गीता उर्फ लक्ष्मी मीणा बनाम मध्य प्रदेश राज्य' मामले में तय किए गए सुरक्षात्मक दिशा-निर्देशों को इन जिलों में लागू करने में पूरी तरह विफल रही है। इन नियमों के तहत जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन, नियमित निरीक्षण, वार्षिक पुनर्भरण अध्ययन (Annual Replenishment Study) और अवैध वाहनों पर भारी जुर्माना लगाने का स्पष्ट प्रावधान है, जिनका धरातल पर पालन नहीं किया जा रहा है।
सिंध नदी का यह पूरा क्षेत्र पर्यावरण और वन्यजीवों के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह राष्ट्रीय चंबल (घड़ियाल) वन्यजीव अभ्यारण्य से पारिस्थितिक रूप से जुड़ा हुआ है। यह नदी मगरमच्छों, प्रवासी पक्षियों और गंभीर रूप से लुप्तप्राय भारतीय फ्लैपशेल कछुओं व घड़ियालों का प्रमुख प्रजनन स्थल मानी जाती है। अनियंत्रित और अवैध खनन के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जल प्रदूषण विकराल रूप ले चुका है और इन दुर्लभ जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कगार पर पहुंच गया है।
एनजीटी ने इस मामले को पर्यावरण से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर मुद्दा माना है। ट्रिब्यूनल ने सभी प्रतिवादियों को अगले चार हफ्तों के भीतर नोटिस का जवाब देने और छह सप्ताह के भीतर विस्तृत ई-फाइलिंग जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।

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