पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में विरोध प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की क्रूर कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों की मौत। ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन की निंदा और संयुक्त राष्ट्र में उठे मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दों की विस्तृत रिपोर्ट।

पाकिस्तान। स्टार समाचार वेब
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में स्थिति लगातार विस्फोटक बनी हुई है। बुनियादी अधिकारों और स्थानीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाई ने मानवीय संकट पैदा कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसक घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जारी अशांति के दौरान पाकिस्तानी सेना की बर्बरता सामने आई है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों की क्रूर कार्रवाई के कारण 50 से अधिक निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मुजफ्फरबाद सहित कई क्षेत्रों में लोग देर रात तक सड़कों डटे रहे। स्थानीय नागरिक समूहों के अनुसार, यह प्रदर्शन अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए वादों को पूरा कराने की मांग को लेकर हो रहा था।
अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (HRF) ने पीओके में निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए बल प्रयोग की तीव्र शब्दों में निंदा की है। एचआरएफ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इसके साथ ही, पाकिस्तानी अधिकारियों पर सबूतों को मिटाने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रशासन ने अस्पतालों से शवों को जबरन हटा दिया है और बड़ी संख्या में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व आम नागरिकों को हिरासत में ले लिया है। एचआरएफ ने पाकिस्तान से तुरंत हिंसा रोकने, मोबाइल और इंटरनेट संचार सेवाओं को बहाल करने तथा मानवाधिकारों के हनन के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
इस भीषण संकट के बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उच्चाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पीओके के बिगड़ते हालात से संयुक्त राष्ट्र को अवगत कराया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की, ताकि क्षेत्र में और अधिक रक्तपात को रोका जा सके। दूसरी ओर, इस दमनकारी कार्रवाई के विरोध में पड़ोसी क्षेत्रों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। शुक्रवार, 31 जुलाई को लाहौर प्रेस क्लब के बाहर पीओके के कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता दिखाने और सेना की हिंसा की निंदा करने के लिए एकत्र हुए कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा की आगामी उच्च स्तरीय बैठक से पहले अमेरिका ने फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को न्यूयॉर्क आने के लिए वीजा देने से इंकार कर दिया है। अमेरिका के इस फैसले के बाद महासभा में एक विशेष प्रस्ताव लाया गया, ताकि राष्ट्रपति अब्बास वीडियो लिंक के जरिए बैठक को संबोधित कर सकें।
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पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
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